देवरिया में बिना मान्यता के संचालित स्कूलों पर कार्रवाई शुरू: तीन विद्यालयों को बंद करने का नोटिस

देवरिया, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बिना मान्यता के संचालित निजी स्कूलों पर प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। बेसिक शिक्षा विभाग ने तीन स्कूलों को बंद करने का नोटिस जारी किया है, क्योंकि ये स्कूल मानकों का उल्लंघन कर रहे थे। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को केवल मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही भेजें। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई का विवरण

बेसिक शिक्षा विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, देवरिया नगर क्षेत्र के बीईओ देवमुनि वर्मा ने तीन निजी स्कूलों को बंद करने का नोटिस दिया है। नोटिस में तीन दिन के भीतर छात्रों का नामांकन निकटतम परिषदीय या मान्यता प्राप्त स्कूल में कराने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई से स्थानीय स्तर पर खलबली मच गई है।

  • जीनियस पब्लिक स्कूल (अबूबकर नगर मोहल्ला, देवरिया शहर): बिना मान्यता संचालित।

  • आरडी मेमोरियल जूनियर हाईस्कूल (न्यू कॉलोनी, देवरिया शहर): बिना मान्यता संचालित। नोटिस के बाद भी स्कूल बंद नहीं हुआ, इसलिए दोबारा नोटिस जारी।

  • आरडीएम एकेडमी (बरहज): नर्सरी से कक्षा 5वीं तक मान्यता है, लेकिन कक्षा 6वीं से 8वीं तक बिना मान्यता पढ़ाई। निरीक्षण में 100 से अधिक बच्चे पाए गए। कक्षा 6वीं से 8वीं को बंद करने का आदेश।

बीईओ देवमुनि वर्मा ने कहा, “ये स्कूल बिना मान्यता संचालित हैं। छात्रहित में तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया गया है। नामांकन निकटतम मान्यता प्राप्त स्कूलों में कराएं। अन्यथा प्रबंधक और प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।”

अभिभावकों की चिंता

अभिभावक परेशान हैं। कई परिवारों ने बताया कि बिना मान्यता के स्कूलों में फीस कम होने से उन्होंने बच्चों को भेजा था। अब नामांकन बदलने से आर्थिक और शैक्षिक हानि हो रही है। एक अभिभावक ने कहा, “स्कूल ने मान्यता का दावा किया था, लेकिन अब बच्चे का भविष्य खतरे में है।”

विभाग का संदेश

बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की कि वे केवल मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही बच्चों को भेजें। विभाग ने चेतावनी दी कि बिना मान्यता के संचालन पर कठोर कार्रवाई होगी। निरीक्षण अभियान जारी रहेगा।

निष्कर्ष

देवरिया में बिना मान्यता के स्कूलों पर कार्रवाई छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है। प्रशासन से अपेक्षा है कि अभिभावकों को वैकल्पिक व्यवस्था में सहायता प्रदान करे।

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