गगनयान को भेजने की तैयारी लगभग पूरी, वर्ष के अंत में महिला रोबोट व्योममित्र जाएगी अंतरिक्ष : सरकार

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि गगनयान को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी लगभग हो चुकी है और इसकी आखिरी परीक्षण उड़ान के तहत इस वर्ष के अंत में महिला रोबोट ‘व्योममित्र’ अंतरिक्ष में जाएगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय, अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री सिंह ने लोकसभा में अंतरिक्ष संबंधी पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह भी कहा कि भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान के लिए चुने गए चार अंतरिक्षयात्रियों को सार्वजनिक चमक-दमक से दूर रखा गया था ताकि किसी तरह ध्यान नहीं भटके क्योंकि वे कुछ प्रशिक्षण कार्यक्रमों से गुजर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘गगनयान को भेजने की तैयारी लगभग हो चुकी है। आखिरी परीक्षण उड़ान, जो एक प्रकार का ‘ड्रेस रिहर्सल’ होगा, के तहत महिला रोबोट ‘व्योममित्र’ इस साल के आखिर में अंतरिक्ष में जाएगी और सुरक्षित तरीके से लौटैगी। सारी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद गगनयान अंतरिक्ष में जाएगा।’’

उन्होंने शिवसेना के धैर्यशील माने के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि आज सुखद संयोग है कि प्रश्नकाल का पहला प्रश्न अंतरिक्ष से संबंधित है और आज तड़के ही अंतरिक्षयात्री सुनीता विलियम्स धरती पर लौटी हैं।

सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुनीता विलियम्स के लिए लिखे गए पत्र का उल्लेख किया और बताया कि ‘‘हमारी तरफ से भी सुबह चार बजे सोशल मीडिया के माध्यम से गौरव और राहत की अनुभूति वाला संदेश उनके लिए चला गया है।’’

मंत्री जब यह बता रहे थे, उसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी सदन में पहुंचे।

सिंह ने गगनयान के अंतरिक्षयात्रियों को जनता की नजरों से दूर रखे जाने के कांग्रेस की आर सुधा के पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘यह विचार था कि मीडिया और जनता के बीच अधिक प्रचार होने से ध्यान भटक सकता है जो सभी के हित में नहीं होगा।’’

मिशन के लिए ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णन नायर, अंगद प्रताप, अजीत कृष्णन और शुभांशु शुक्ला का चयन किया गया है।

केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि इन चारों अंतरिक्षयात्रियों में से शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा में अन्य देशों के अंतरिक्षयात्रियों के साथ जाएंगे।

सिंह ने कहा, ‘‘इनमें एक विंग कमांडर शुक्ला हैं जो अब ग्रुप कैप्टन शुक्ला हैं। इसलिए उनका नाम थोड़ा व्यापक रूप से पहचाना गया।’’

जितेंद्र सिंह ने चंद्रयान-4 के संदर्भ में बताया कि यह मूलत: चंद्रमा से नमूने लाने के लिए है, लेकिन वो उन सभी प्रक्रियाओं को अंजाम देगा जो आने वाले मिशन के लिए अनिवार्य रहेंगी। उन्होंने कहा कि चंद्रयान से आगे के सभी मिशन के लिए अनुभव मिलेगा और इसमें ‘डॉकिंग’ तथा ‘अनडॉकिंग’ के अनुभव भी मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि 2027 में चंद्रयान-4, 2028 में शुक्र ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने के लिए ‘वीनस मिशन’ भेजा जाएगा, 2035 में भारत अंतरिक्ष स्टेशन खोला जाएगा और 2040 में भारतीय मूल का व्यक्ति चांद की धरती पर उतरेगा।

सिंह ने यह भी बताया कि देश का चौथा अंतरिक्ष लांच पैड तमिलनाडु के तुतिकोरिन में बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘1979 में इसरो की स्थापना के कई वर्ष बाद देश का पहला लांच पैड बनाया गया था। इसके दस वर्ष बाद दूसरा लांच पैड श्रीहरिकोटा में तैयार किया गया।’’

सिंह ने बताया, ‘‘सरकार ने श्रीहरिकोटा में तीसरा लांचपैड बनाना शुरू कर दिया है और चौथा लांच पैड तमिलनाडु के तुतिकोरिन में बनाने की शुरुआत हो गई है।’’

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