Saturday, August 30, 2025
Homeराज्यभू-विस्थापित परिवार की महिलाए अर्धनग्न प्रदर्शन करने हुई मजबूर, एसईसीएल प्रबंधन को...

भू-विस्थापित परिवार की महिलाए अर्धनग्न प्रदर्शन करने हुई मजबूर, एसईसीएल प्रबंधन को शर्म आनी चाहिए-मिथिलेश बघेल

-आम आदमी पार्टी ने दर्ज कराई आपत्ति

-भू-विस्थापित परिवारों को नौकरी दे एसईसीएल प्रबंधन-दुर्गा झा

कोरबा, (वेब वार्ता)। आम पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा झा ने कोरबा में भू-विस्थापित परिवारों के प्रति एसईसीएल प्रबंधन के अन्याय पर रोष जताते हुए कहा कि कुसमुंडा परियोजना में कालांतर में दी गई फर्जी नौकरियों के कारण अनेक भू-विस्थापित परिवार के लोग नौकरी के लिए भटक रहे हैं। भू-विस्थापितों के खातों में दूसरों को फर्जी नौकरी देने की बात कह रहें हैं, जिसके खिलाफ महिलाओं ने मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के भीतर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। इन्होंने अधिकारी को कहा कि आप चूड़ी पहन लो, हम यहां से चले जाएंगे। प्रबंधन को परिवारों के साथ न्याय करना चाहिए।

इस मामले में प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका शुक्ला ने कहा कि प्रबंधन की अनदेखी से भू-विस्थापितों परिवार की महिलाएं अर्धनग्न प्रदर्शन करने मजबूर हो राशि है, जिसके लिये एसईसीएल प्रबंधन को शर्म आनी चाहिए। एसईसीएल के अधिकारी यह सफाई देते रहे कि जिनकी जमीन ली गई है, उनके द्वारा दिए सहमति के आधार पर एवं राज्य शासन की इकाईयों के द्वारा किए गए सत्यापन के उपरांत ही नौकरी दी गई है। तो इसमें एसईसीएल की गलती कहां ? इस पूरे मामले में तत्कालीन अधिकारी पर अनेक लोगों को फर्जी नौकरियां देने का आरोप है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष (महिला विंग) मिथिलेश बघेल ने बताया कि वर्ष 1978 का वह दौर था जब अविभाजित मध्यप्रदेश में भी पुनर्वास नीति लागू नहीं हुई थी उस समय कलेक्टर भू-अर्जन समिति के अध्यक्ष हुआ करते थे और उनके अध्यक्षता में गठित कमेटी में शामिल सदस्यों के साथ-साथ आसपास के विधायकों के द्वारा बनाई गई नीति के अनुसार ही कार्य होता था। लगभग तीन एकड़ भूमि पर एक नौकरी का प्रावधान रखा गया, इसी तरह यह प्रावधान भी था कि यदि किसी की छोटी जमीन भी है तो उसे भी नौकरी दी जाएगी, ताकि मैनपावर की पूर्ति की जा सके। कोयला खदानों के संचालन के लिए मानव संसाधन की आवश्यकता थी।

प्रदेश सह सचिव अनुषा जोसेफ़ ने कहा कि जमीनों में जमकर हेरफेर किया गया और टुकड़ों में जमीन की बिक्री करवा रिकॉर्ड में दिखाकर नौकरियों को बेचा बड़ी जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़े करवा कर उन टुकड़ों पर नौकरियां दिलवाई गई और यह पूरा फर्जीवाड़ा हुआ। इसके अलावा कई ऐसे भी लोग थे जो उस समय नौकरी नहीं करना चाहते थे और उनके घर में कोई नौकरी लायक आश्रित भी नहीं था, किंतु चालाक लोगों ने इनसे समझौता कराकर कोई न कोई नाता जोड़कर, सहमति लेकर नौकरी हासिल कर ली। अब ऐसे ही अधिकांश जमीन मालिकों के परिवार जिनके खाते में नौकरी उनके आश्रितों को नहीं मिली है, वह अपनी नौकरी मांग रहे हैं सारा कुछ तत्कालीन चंद राजस्व अधिकारियों-कर्मियों और एसईसीएल के चंद अधिकारियों की सांठगांठ से हुआ जिसका खामियाजा आज तक भूविस्थापित भुगतते आ रहे हैं।

कोरबा लोकसभा अध्यक्ष प्रतिमा सिन्हा ने कहा कि आज भी प्रभावितों को रोजगार, मुआवजा, बसाहट, पुनर्वास के मामले में कहीं ना कहीं प्रबंधन की नीतियां और कार्यशैली सवालों व नाराजगी के घेरे में है। उन्होंने कहा की आम आदमी पार्टी एसईसीएल प्रबंधन से मांग करती है कि सभी भू-स्थापितों को उचित मुआवजा और नौकरी दी जाए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

वेब वार्ता समाचार एजेंसी

संपादक: सईद अहमद

पता: 111, First Floor, Pratap Bhawan, BSZ Marg, ITO, New Delhi-110096

फोन नंबर: 8587018587

ईमेल: webvarta@gmail.com

सबसे लोकप्रिय

Recent Comments