दंगाइयों से वसूली का कानून लागू
देहरादून, 26 मार्च (वेब वार्ता)। उत्तराखंड सरकार ने दंगा और प्रदर्शन के दौरान सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड लोक व निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम’ की नियमावली को मंजूरी दे दी है।
ट्रिब्यूनल करेगा मामलों का निपटारा
अधिनियम के तहत सभी मामलों का निपटारा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के माध्यम से किया जाएगा। खास बात यह है कि ट्रिब्यूनल के फैसले को किसी भी सिविल न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
मौत और चोट पर तय जुर्माना
नए नियमों के अनुसार दंगे या प्रदर्शन के दौरान किसी की मृत्यु होने पर आठ लाख रुपये और घायल होने पर दो लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। वहीं संपत्ति के नुकसान की भरपाई बाजार मूल्य से कम पर नहीं होगी।
दावा दाखिल करने की समय सीमा तय
निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए पीड़ित तीन वर्ष के भीतर निर्धारित शुल्क के साथ याचिका दाखिल कर सकता है। वहीं लोक संपत्ति के मामलों में तीन माह के भीतर दावा अधिकरण में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
आंदोलन के आयोजकों पर भी कार्रवाई
इस कानून के तहत उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने हड़ताल, बंद या दंगों का नेतृत्व किया या उनका आह्वान किया।
हथियार और खतरनाक सामग्री पर प्रतिबंध
नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार के शस्त्र, लाठी, चाकू, ज्वलनशील पदार्थ या खतरनाक रसायनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
वीडियोग्राफी होगी अनिवार्य
हर थाने को स्थानीय वीडियो ऑपरेटरों का पैनल तैयार करना होगा, ताकि घटनाओं की रिकॉर्डिंग की जा सके। वीडियो को प्रमाणित कर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में मान्य किया जाएगा।



