देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर होगा स्मार्ट, 73 किमी ई-बस सिस्टम से जाम से मिलेगी राहत

देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर को मिलेगा नया स्वरूप

देहरादून, 27 मार्च 2026 (वेब वार्ता)। उत्तराखंड के सबसे व्यस्त देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर की सूरत अब बदलने जा रही है। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने कांप्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी-2024) की समीक्षा करते हुए इसे स्मार्ट और जाम मुक्त बनाने पर जोर दिया।

73 किमी लंबा ई-बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रस्तावित

बैठक में बताया गया कि तीनों शहरों के बीच करीब 73 किलोमीटर लंबा इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही हरिद्वार में पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) और प्रमुख स्थलों को जोड़ने के लिए रोपवे कनेक्टिविटी का भी प्रस्ताव रखा गया है।

ITS और स्मार्ट पार्किंग से जाम से मिलेगी राहत

योजना के तहत इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम (ITS), आधुनिक पार्किंग प्रबंधन और बाईपास सड़कों के जरिए ट्रैफिक जाम को कम किया जाएगा। इससे दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

कुंभ और कांवड़ में ट्रैफिक प्रबंधन होगा आसान

अधिकारियों के अनुसार, यह योजना कुंभ और कांवड़ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन में मील का पत्थर साबित होगी। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के जरिए इस कॉरिडोर को देश के लिए मॉडल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मास्टर प्लान में शामिल करने के निर्देश

सचिव आवास ने निर्देश दिए कि सीएमपी के सभी प्रस्तावों को मास्टर प्लान में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। बैठक में मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी बृजेश कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इंजीनियरों की सूचीबद्धता होगी डिजिटल

प्रदेश में भवन निर्माण कार्यों को गति देने के लिए आवास विभाग ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरों के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मानचित्र स्वीकृति में देरी कम होगी।

डिजिटल सिस्टम से निर्माण प्रक्रिया होगी आसान

सचिव ने निर्देश दिए कि लंबित प्रस्तावों की जल्द जांच कर प्रमाणपत्र जारी किए जाएं और पूरी प्रक्रिया को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया जाए। इसका उद्देश्य सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा देना और आवेदकों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत देना है।

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