लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्रीन एनर्जी मिशन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी के विकास और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस एक्शन प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां स्वदेशी और सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के शोध, उत्पादन, भंडारण और उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
ग्रीन हाइड्रोजन नीति से मिलेगी नई ऊर्जा
योगी सरकार की ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत रिसर्च, इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। योजना के अंतर्गत दोनों सेंटर ऑफ एक्सीलेंस देश के प्रतिष्ठित तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे। सरकार इन संस्थानों को 50 करोड़ रुपये तक की शत-प्रतिशत सहायता प्रदान करेगी, ताकि अत्याधुनिक लैब, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें।
स्टार्टअप्स को हर साल 25 लाख रुपये की फंडिंग
सरकार की नीति के तहत ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को 5 वर्षों तक प्रति वर्ष अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। शर्त यह होगी कि ये स्टार्टअप्स किसी मान्यता प्राप्त संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर से जुड़े हों। इस योजना से युवा शोधकर्ताओं और उद्यमियों को न केवल आत्मनिर्भरता का अवसर मिलेगा, बल्कि नई तकनीकें उद्योग जगत तक पहुंचेंगी।
नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य में यूपी की भूमिका
भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर में राज्य के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया था। यह अनुमान है कि इस संयंत्र से प्रतिवर्ष करीब 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। यह कदम राज्य को ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
- उत्तर प्रदेश में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस।
- 50 करोड़ रुपये तक की सरकारी वित्तीय सहायता।
- ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को 5 वर्षों तक 25 लाख रुपये प्रतिवर्ष फंडिंग।
- गोरखपुर में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी।
- नीति का लक्ष्य – सस्ती और स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक का विकास।
ग्रीन जॉब्स और रिसर्च को मिलेगा प्रोत्साहन
इस नीति से प्रदेश में ग्रीन जॉब्स और शोध-आधारित रोजगार के अवसरों में तेजी से वृद्धि होगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी से अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध होगा। इससे उत्तर प्रदेश न केवल राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का नेतृत्व करेगा, बल्कि विदेशी निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन नीति से उत्तर प्रदेश की ऊर्जा निर्भरता कम होगी और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति आएगी। इस पहल से “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” को भी मजबूती मिलेगी।
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