लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में किए गए नियामक और प्रशासनिक सुधार अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से नजर आने लगे हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार के सुधारवादी कदमों ने जहां सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया है, वहीं उद्योग-व्यापार के लिए प्रदेश को एक ‘ड्रीम डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित किया है। 577 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने, अनुपालनों में व्यापक कटौती और पुराने कानूनों के खात्मे से प्रदेश का कारोबारी माहौल पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।
नियामक सुधारों से बदली प्रशासनिक कार्यशैली
पहले जहां उद्योगों को स्वीकृतियों और लाइसेंस के लिए लंबी प्रक्रियाओं और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था, वहीं अब समयबद्ध निस्तारण को प्राथमिकता दी जा रही है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ने से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है। 948 पुराने कानूनों को समाप्त कर सरकार ने उन जटिलताओं को दूर किया है, जो वर्षों से निवेश में बाधा बन रही थीं।
अनुपालनों में कटौती से व्यापारियों को राहत
| सुधार | प्रभाव |
|---|---|
| 577 प्रावधान अपराधमुक्त | छोटे उल्लंघनों पर जेल का डर खत्म |
| ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त | कारोबार शुरू करना आसान |
| अनुपालनों का डिजिटलीकरण | पारदर्शिता बढ़ी, प्रशासनिक बोझ घटा |
| श्रम कानूनों में बदलाव | निवेश और रोजगार को प्रोत्साहन |
इन सुधारों के बाद व्यापारियों और उद्यमियों में भरोसा बढ़ा है। छोटे-मोटे तकनीकी उल्लंघनों पर अब कारावास जैसे कठोर प्रावधान नहीं होने से कारोबारी बिना भय के अपने व्यवसाय का विस्तार कर पा रहे हैं।
निवेश और रोजगार को मिली नई गति
नियामक सरलीकरण के बाद निवेश प्रस्तावों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उद्योगपति एस.के. आहूजा का कहना है कि उत्तर प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को जिस तरह व्यवहार में लागू किया गया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है। निवेश बढ़ने के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी गति मिली है, जो प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
एमएसएमई सेक्टर को मिला विशेष बल
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन सुधारों का सबसे अधिक लाभ एमएसएमई सेक्टर को मिला है। प्रदेश में वर्तमान में लगभग 96 लाख एमएसएमई सक्रिय हैं और जल्द ही यह संख्या एक करोड़ को पार करने की संभावना है। सरल पंजीकरण प्रक्रिया और दंडात्मक प्रावधानों में कमी ने छोटे उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
श्रम कानून सुधारों से बेहतर औद्योगिक माहौल
श्रम कानूनों में बदलाव के बाद उद्योगों में कार्यशांति का माहौल बना है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी के अनुसार, अन्य राज्यों के उद्योग जगत भी अब उत्तर प्रदेश जैसे प्रावधानों की मांग कर रहे हैं। मध्यस्थता और सुधारात्मक दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने से विवादों का समाधान तेजी से हो रहा है।
डिजिटल गवर्नेंस से बढ़ी पारदर्शिता
डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार से निगरानी व्यवस्था और मजबूत हुई है। विभिन्न पोर्टल और डैशबोर्ड के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति पर सीधे नजर रखी जा रही है। नियमित समीक्षा से विभागीय जवाबदेही तय हो रही है, जिससे शासन व्यवस्था में भरोसा बढ़ा है।
निष्कर्ष
योगी सरकार द्वारा किए गए नियामक सरलीकरण, डिक्रिमिनलाइजेशन और डिजिटलीकरण ने उत्तर प्रदेश को उद्योग-व्यापार के लिए आकर्षक और भरोसेमंद गंतव्य बना दिया है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि प्रदेश केवल निवेश आकर्षित करने वाला नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाला मॉडल राज्य बने। इन सुधारों की निरंतरता ही आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
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