लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
UP Green Hydrogen Project: उत्तर प्रदेश स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के गोरखपुर और रामपुर जिलों में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं से UP Green Hydrogen Project को नई गति मिलने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा विभाग और उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) के सहयोग से शुरू की जा रही ये परियोजनाएं भविष्य में प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)
- गोरखपुर और रामपुर में स्थापित हो रही ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं
- टोरेंट पावर का 0.5 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट गोरखपुर में
- रामपुर में 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता वाला ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र
- उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम
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UP Green Hydrogen Project: गोरखपुर में टोरेंट पावर का पायलट प्रोजेक्ट
UPNEDA के निदेशक इंद्रजीत सिंह के अनुसार गोरखपुर में टोरेंट पावर द्वारा 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा होगी।
यह परियोजना UP Green Hydrogen Project के तहत प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग और उसके व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने पर भविष्य में बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किए जा सकते हैं।
📌 ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं की मुख्य विशेषताएं
- गोरखपुर में 0.5 मेगावाट क्षमता का पायलट प्रोजेक्ट
- रामपुर में 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र
- स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
- औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
रामपुर में स्थापित होगा उच्च क्षमता वाला संयंत्र
इसी क्रम में रामपुर जिले में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा होगी।
यह परियोजना UP Green Hydrogen Project के तहत प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेगी। इसके माध्यम से क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जाता है ग्रीन हाइड्रोजन
विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन माना जाता है। इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए अत्यंत अनुकूल ऊर्जा स्रोत माना जाता है।
ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग परिवहन, ऊर्जा भंडारण और औद्योगिक उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसी कारण विश्वभर में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है।
🔎 यूपी को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा
- प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं की शुरुआत
- स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
- निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाएं मजबूत
- कार्बन उत्सर्जन कम करने में मिलेगी मदद
उत्तर प्रदेश बनेगा स्वच्छ ऊर्जा का प्रमुख केंद्र
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि UP Green Hydrogen Project के माध्यम से उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि प्रदेश में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित किया जाए। गोरखपुर और रामपुर में स्थापित हो रही ये परियोजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।







