लखनऊ, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष आलोक वर्मा ने इसे किसानों की अपेक्षाओं से कोसों दूर बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले अन्नदाता को इस बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली है और किसानों की जमीनी समस्याएं एक बार फिर अनसुनी रह गई हैं।
किसानों की आय बढ़ाने की स्पष्ट नीति नहीं
आलोक वर्मा ने कहा कि बजट केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की नीति और नियति का प्रतिबिंब होता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस बजट में किसानों की आय वृद्धि को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस दृष्टिकोण दिखाई नहीं देता। कर-मुक्त बीज, कृषि यंत्रों की सुलभता और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जैसी अपेक्षाएं अधूरी रह गई हैं।
खाद की बोरी घटने से बढ़ा आर्थिक बोझ
उन्होंने कहा कि महंगाई, खेती की बढ़ती लागत और कर्ज के बोझ से किसान पहले ही परेशान है। ऐसे में खाद की बोरी का वजन घटाया जाना किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक आघात के समान है, जिससे उनकी उत्पादन लागत और अधिक बढ़ गई है।
| विवरण | पहले | वर्तमान | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| खाद की बोरी का वजन | 50 किलोग्राम | 40 किलोग्राम | लागत में वृद्धि |
| कृषि लागत | मध्यम | उच्च | मुनाफा घटा |
प्रमुख फसलों के लिए ठोस प्रावधान नहीं
श्री वर्मा ने कहा कि दलहन, तिलहन, गेहूं, धान और कपास जैसी प्रमुख फसलों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बजट में कोई दूरदर्शी योजना नहीं दिखाई देती। इससे किसानों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है।
- फसल संरक्षण के लिए पर्याप्त बजट का अभाव
- कृषि लागत नियंत्रण की नीति नहीं
- उत्पादन प्रोत्साहन की कमी
- किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव
सिंचाई, एमएसपी और मंडी व्यवस्था पर चुप्पी
उन्होंने कहा कि सिंचाई योजनाओं, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, न्यूनतम समर्थन मूल्य की स्पष्टता और मंडी व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बजट मौन प्रतीत होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण केंद्रों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस पहल नहीं की गई।
किसानों के भविष्य पर जताई चिंता
आलोक वर्मा ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसान स्वयं को असहाय महसूस कर रहा है। कृषि क्षेत्र का भविष्य अनिश्चितताओं के बीच खड़ा नजर आ रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
भाकियू जिलाध्यक्ष आलोक वर्मा ने स्पष्ट कहा कि यह बजट कृषक हितों के अनुरूप नहीं है। सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर किसानों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। जब तक कृषि को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं हो सकता।
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