यूपी सरकार का बजट कागजी और जनविरोधी, बढ़ता कर्ज प्रदेश के लिए गंभीर खतरा: आशीष सिंह

हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता

हरदोई में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष आशीष सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे “कागजी और जनविरोधी” करार दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने लगभग नौ लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जिससे प्रत्येक नागरिक पर औसतन करीब 37 हजार रुपये का भार बढ़ गया है। यह स्थिति प्रदेश की आर्थिक सेहत के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।

प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को बताया गंभीर संकट

आशीष सिंह ने कहा कि सरकार लगातार कर्ज लेकर बजट का आकार बढ़ा रही है, लेकिन इसका सीधा लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा है। बढ़ता ऋण आने वाली पीढ़ियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिरता पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

विवरणआंकड़ाप्रभाव
कुल कर्जलगभग 9 लाख करोड़ रुपयेराजकोषीय दबाव में वृद्धि
प्रति नागरिक कर्जकरीब 37 हजार रुपयेभविष्य पर आर्थिक बोझ
अवधिपिछले 9 वर्षदीर्घकालिक वित्तीय जोखिम

रोजगार और युवाओं को लेकर उठाए सवाल

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बजट में बड़े-बड़े आंकड़े और आकर्षक घोषणाएं कर युवाओं को भ्रमित कर रही है। रोजगार सृजन के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि स्थायी और सम्मानजनक नौकरियों के अवसर नहीं बढ़े हैं। बेरोजगारी कम करने के लिए कोई ठोस और प्रभावी योजना बजट में दिखाई नहीं देती।

महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर सवाल

महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर आशीष सिंह ने कहा कि सरकार मंचों से बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर महिला अपराध की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए व्यापक और प्रभावी योजनाओं का अभाव नजर आता है।

  • महिला अपराध में अपेक्षित कमी नहीं
  • सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता की कमी
  • योजनाओं का सीमित प्रभाव

शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था पर आलोचना

श्री सिंह ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों और अस्पतालों की आधारभूत सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। वहीं, अपराध नियंत्रण को लेकर किए जा रहे दावे भी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते।

किसानों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आय दोगुनी करने का वादा केवल नारा बनकर रह गया है। कृषि लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि खाद की प्रति बोरी में 10 किलो की कटौती से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य और फसल भुगतान में देरी से भी किसान परेशान हैं।

भ्रष्टाचार और निगरानी तंत्र पर सवाल

आशीष सिंह ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के सरकारी दावे भी खोखले साबित हुए हैं। विकास योजनाओं की धनराशि के पारदर्शी उपयोग के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र की कमी है, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

निष्कर्ष

आशीष सिंह ने कहा कि प्रदेश का यह बजट आम जनता, किसानों, युवाओं और महिलाओं की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में असफल रहा है। सरकार को आंकड़ों की बाजीगरी छोड़कर जनहित में ठोस, पारदर्शी और दूरदर्शी नीतियां अपनानी चाहिए, ताकि प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

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