हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। बुधवार को अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में आधा दर्जन से अधिक सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। अधिवक्ता संघ अध्यक्ष जेपी त्रिवेदी के नेतृत्व में ब्राह्मण महासभा, क्षत्रिय महासभा, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, पूर्व सैनिक एसोसिएशन, मानवाधिकार एसोसिएशन, क्षत्रिय करणी सेना और ब्राह्मण परशुराम संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता डीएम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि ये नियम शिक्षा सुधार नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर हमला हैं। प्रदर्शन के बाद भारत के राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
प्रदर्शन और ज्ञापन का विस्तृत विवरण
प्रदर्शनकारियों ने डीएम कार्यालय परिसर में एकत्र होकर जोरदार नारेबाजी की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियमों की भाषा अस्पष्ट और भ्रमित करने वाली है, जिससे दुरुपयोग की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि ये नियम छात्रों और शिक्षकों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। जेपी त्रिवेदी ने कहा कि नियम शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करेंगे और सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाएंगे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारेबाजी से पूरा कलेक्ट्रेट परिसर गूंज उठा।
प्रदर्शन के बाद संगठनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें यूजीसी नियमों को निरस्त करने और शिक्षा व्यवस्था के साथ हो रहे कथित अन्याय को तत्काल रोकने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि नियमों से शिक्षा का स्तर गिरेगा और छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और संगठनों की मांगें
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही। सिटी मजिस्ट्रेट ने ज्ञापन प्राप्त कर उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी नियमों को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज ज्ञापन दिया गया है, कल आंदोलन और उससे आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।
संगठनों ने कहा कि ये नियम शिक्षा को बाजारीकरण की ओर ले जा रहे हैं और सभी वर्गों के छात्रों के लिए अन्यायपूर्ण हैं। उन्होंने सरकार से नियमों पर पुनर्विचार की मांग की।
- नेतृत्व: अधिवक्ता संघ अध्यक्ष जेपी त्रिवेदी।
- संगठन: ब्राह्मण महासभा, क्षत्रिय महासभा, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, पूर्व सैनिक एसोसिएशन, मानवाधिकार एसोसिएशन, क्षत्रिय करणी सेना, ब्राह्मण परशुराम संगठन।
- मांग: यूजीसी नए नियम तत्काल वापस लिए जाएं।
- चेतावनी: आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
भविष्य की कार्रवाई और जनता के लिए संदेश
प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन जिले से प्रदेश स्तर तक फैलाया जाएगा। उन्होंने अन्य संगठनों और छात्रों से भी विरोध में शामिल होने की अपील की। जनता के लिए संदेश है कि शिक्षा सभी के लिए सुलभ और निष्पक्ष होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी नियमों पर व्यापक बहस और संवाद आवश्यक है।
भविष्य में ऐसे प्रदर्शन अन्य जिलों में भी फैल सकते हैं, जो शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय बहस को तेज करेंगे।
निष्कर्ष
हरदोई में यूजीसी नए नियमों के खिलाफ निकला प्रदर्शन शिक्षा में समानता और सामाजिक न्याय की रक्षा का प्रतीक है। अधिवक्ता संघ और सामाजिक संगठनों की एकजुटता लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को मजबूत करती है। सरकार को मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि शिक्षा नीति सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दे और किसी वर्ग को असुरक्षित न करे। यह आंदोलन शिक्षा अधिकार और सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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