हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में 28 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार द्वारा लागू यूजीसी 2026 नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। केन सोसायटी नेहरू डिग्री कॉलेज के छात्रों के नेतृत्व में निकला जनाक्रोश मार्च राम जानकी मंदिर परिसर से शुरू हुआ और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सिनेमा चौराहा पहुंचा। हजारों छात्र-छात्राओं ने “यूजीसी 2026 वापस लो”, “छात्र विरोधी कानून नहीं चलेगा”, “शिक्षा का बाजारीकरण बंद करो” जैसे नारे लगाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में कथित पूंजीवादी हस्तक्षेप और गरीब-ग्रामीण छात्रों की उच्च शिक्षा पहुंच पर प्रभाव के विरोध में है।
जनाक्रोश मार्च का विस्तृत विवरण
प्रदर्शन राम जानकी मंदिर परिसर से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा। छात्रों ने हाथों में तख्तियां लिए हुए नारे लगाए, जिनमें यूजीसी 2026 को शिक्षा विरोधी और बाजारीकरण को बढ़ावा देने वाला बताया गया। मार्च के दौरान पूरा इलाका नारेबाजी से गूंज उठा। छात्रों ने आरोप लगाया कि नए नियमों से उच्च शिक्षा महंगी हो जाएगी और गरीब, मध्यम वर्ग तथा ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यह आंदोलन युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाता है, जो शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के बजाय व्यवसाय बनाने का आरोप सरकार पर लगा रहे हैं।
सिनेमा चौराहा पहुंचकर छात्रों ने एकजुट होकर जोरदार धरना दिया। यहां वक्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा सरकार पर छात्र-विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारेबाजी और तख्तियां सरकार के खिलाफ आक्रोश को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर रही थीं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और छात्रों की मांग
स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शन को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। छात्र नेताओं ने यूजीसी 2026 को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन जिले से प्रदेश स्तर तक फैलाया जाएगा। उन्होंने अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों से भी इस विरोध में शामिल होने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानून शिक्षा को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपने की साजिश है, जो संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
छात्रों ने कहा कि सरकार शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के बजाय उसे महंगा और पहुंच से बाहर बना रही है, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। यह आंदोलन देशव्यापी छात्र विरोध की शुरुआत हो सकता है।
- नारे: “यूजीसी 2026 वापस लो”, “शिक्षा का बाजारीकरण बंद करो”, “छात्र विरोधी कानून नहीं चलेगा”।
- प्रारंभ स्थल: राम जानकी मंदिर परिसर, समाप्ति: सिनेमा चौराहा।
- नेतृत्व: केन सोसायटी नेहरू डिग्री कॉलेज के छात्र।
- मांग: यूजीसी 2026 तत्काल वापस लिया जाए।
भविष्य की कार्रवाई और जनता के लिए संदेश
छात्र नेताओं ने घोषणा की कि यदि केंद्र सरकार ने यूजीसी 2026 पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें हड़ताल, रेल रोको और राज्यव्यापी प्रदर्शन शामिल होंगे। उन्होंने अन्य शैक्षणिक संस्थानों से एकजुट होने की अपील की। जनता के लिए संदेश है कि शिक्षा लोकतंत्र का आधार है और इसे बाजारीकरण से बचाना युवाओं का अधिकार है। यह प्रदर्शन युवा शक्ति की जागृति को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी नियमों पर व्यापक बहस और संवाद आवश्यक है ताकि शिक्षा सभी के लिए सुलभ बनी रहे।
निष्कर्ष
हरदोई में यूजीसी 2026 के खिलाफ निकला जनाक्रोश मार्च युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष और शिक्षा अधिकार की रक्षा की भावना को उजागर करता है। यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक शिक्षा अधिकार की रक्षा के लिए छात्रों की एकजुटता का प्रतीक है। सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, अन्यथा आंदोलन और व्यापक हो सकता है। शिक्षा का बाजारीकरण रोकना और सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाना सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
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