कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
दो दिवसीय धार्मिक यात्रा: महापरिनिर्वाण मंदिर में चीवर चढ़ाकर विश्व शांति की करेंगी प्रार्थना, रामाभार स्तूप का पूजन भी
थाईलैंड की रॉयल नोबल कंसोर्ट चाओ खुन फ्रा सिनीनात वोंगवजीरापकडी (Chao Khun Phra Sineenat Wongvajirapakdi) 70 सदस्यीय शाही दल के साथ दो दिवसीय धार्मिक यात्रा पर 28 जनवरी 2026 को कुशीनगर पहुंचेंगी। थाई बौद्ध मठ (मोनास्ट्री) के मुख्य भिक्षु फ्रा सोमपोंग ने आज पत्रकारों को यह जानकारी दी। यह पहली बार है जब थाईलैंड की रॉयल कंसोर्ट कुशीनगर की धार्मिक यात्रा पर आ रही हैं।
रॉयल कंसोर्ट सिनीनात थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की सहधर्मचारिणी हैं और बौद्ध धर्म की गहरी अनुयायी मानी जाती हैं। उनकी यह यात्रा भारत-थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। कुशीनगर, जहां भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था, बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
रॉयल कंसोर्ट और उनका दल इन दो दिनों में कुशीनगर में ठहरेंगे और मुख्य रूप से थाई बौद्ध मोनास्ट्री में रहेंगे। यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 28 जनवरी (पहला दिन)
- कार से कुशीनगर पहुंचने के बाद थाई बौद्ध मोनास्ट्री में प्रवास।
- मोनास्ट्री परिसर स्थित उपोसथ हाल, थाई चैत्य और थाईलैंड के पूर्व महाराजा भूमिबोल अदुल्यदेज (रामा IX) की प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना।
- शाम को मोनास्ट्री में ही विश्राम और धार्मिक चर्चाएं।
- 29 जनवरी (दूसरा दिन)
- सुबह महापरिनिर्वाण बुद्ध मंदिर का दर्शन।
- भगवान बुद्ध की विशाल लेटी हुई प्रतिमा पर चीवर चढ़ाना (विशेष वस्त्र अर्पित करना)।
- विश्व शांति तथा भारत-थाईलैंड के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने के लिए विशेष प्रार्थना।
- उसके बाद रामाभार स्तूप (जहां भगवान बुद्ध का अंतिम संस्कार हुआ) का पूजन-वंदन।
- दोपहर का भोजन मोनास्ट्री में।
- भोजन के बाद कार से लुंबिनी (नेपाल) के लिए प्रस्थान।
- लुंबिनी से स्पेशल चार्टर प्लेन द्वारा बैंकॉक वापसी।
थाई मोनास्ट्री में विशेष तैयारियां
फ्रा सोमपोंग ने बताया कि रॉयल कंसोर्ट और उनके शाही दल के लिए मोनास्ट्री में उच्च स्तरीय सुरक्षा, अतिथि सत्कार, धार्मिक और शाही प्रोटोकॉल के अनुसार सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। यह दौरा भारत-थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को और गहरा करेगा।
रॉयल कंसोर्ट का संक्षिप्त परिचय
चाओ खुन फ्रा सिनीनात वोंगवजीरापकडी थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की रॉयल नोबल कंसोर्ट हैं। वे एक योग्य पायलट और पूर्व सेना नर्स हैं। 2019 में उन्हें यह पदवी मिली थी, जो थाईलैंड में लगभग एक शताब्दी बाद किसी महिला को दी गई। हालांकि 2019 में ही कुछ समय के लिए उनके पदवी हटा दी गयी थी, लेकिन 2020 में उन्हें बहाल कर दिया गया। उनकी यात्राएं अक्सर बौद्ध धार्मिक स्थलों पर केंद्रित रहती हैं।
भारत में यात्रा का पूर्वानुक्रम (21 से 29 जनवरी)
- 21 जनवरी: बैंकॉक से स्पेशल चार्टर प्लेन से गया (बिहार) पहुंच।
- 22 जनवरी: राजगीर + नालंदा भ्रमण।
- 23 जनवरी: बोधगया पहुंच।
- 25 जनवरी: बोधगया में धम्मानापावांग धार्मिक कार्यक्रम का उद्घाटन (अंतरराष्ट्रीय बौद्ध भिक्षुओं की भागीदारी)।
- 26 जनवरी: महारानी का जन्मदिन समारोह।
- 27 जनवरी: कार से सारनाथ, धम्मेक स्तूप पूजा।
- 28-29 जनवरी: कुशीनगर प्रवास और पूजा।
- 29 जनवरी दोपहर: लुंबिनी → बैंकॉक वापसी।
महत्व और संदेश
महारानी की यह यात्रा कुशीनगर के लिए ऐतिहासिक है। महापरिनिर्वाण मंदिर और रामाभार स्तूप में उनकी विशेष पूजा न केवल बौद्ध धर्म की गहरी श्रद्धा को दर्शाएगी, बल्कि भारत-थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई ऊर्जा भी प्रदान करेगी। कुशीनगर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र साबित हो रहा है।
शुभ मकर संक्रांति की बधाई!





