सिद्धार्थनगर, सन्दीप पाण्डेय | वेब वार्ता
जनपद सिद्धार्थनगर में टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी के लिखित जवाब के बाद वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त बेसिक शिक्षकों में असमंजस और असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया।
बीएसए कार्यालय पर हुआ जोरदार प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री के लिखित जवाब की प्रतियां जलाकर रोष व्यक्त किया। साथ ही प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक नई शर्तें थोपना न्यायसंगत नहीं है।
2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों में बढ़ी चिंता
शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों और मानकों के अनुसार हुई थी। बाद में लागू हुए नियमों को पीछे से लागू करना उनके साथ अन्याय है। इससे हजारों शिक्षकों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है और मानसिक तनाव बढ़ा है।
- 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता का विरोध
- बीएसए कार्यालय पर नारेबाजी और पुतला दहन
- लिखित जवाब की प्रतियां जलाकर जताया आक्रोश
सरकार से स्पष्ट निर्णय की मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि इस विषय पर जल्द से जल्द स्पष्ट और ठोस निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
निष्कर्ष
टीईटी अनिवार्यता को लेकर सिद्धार्थनगर में उभरा यह विरोध अब एक संगठित आंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। शिक्षकों की बढ़ती नाराजगी सरकार के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में समय रहते समाधान निकालना प्रशासन और शासन दोनों के लिए आवश्यक हो गया है।
👉 शिक्षा और जनहित से जुड़ी खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें – Web Varta
ये भी पढ़ें: टीईटी अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, जयंत चौधरी के बयान के खिलाफ ललितपुर में प्रदर्शन







