सिद्धार्थनगर, राज्य वार्ता | वेब वार्ता
सिद्धार्थनगर के धरौली स्थित सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल में फेयरवेल पार्टी के लिए निर्धारित शुल्क जमा न करने पर कई विद्यार्थियों को विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया गया। बाहर खड़े छात्रों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है।
फेयरवेल शुल्क को लेकर हुआ विवाद
वायरल वीडियो के अनुसार, विद्यालय में हाईस्कूल के विद्यार्थियों के लिए फेयरवेल पार्टी का आयोजन प्रस्तावित था। इसके लिए कक्षा 9 के छात्रों से निर्धारित राशि जमा करने को कहा गया था। जिन विद्यार्थियों ने शुल्क जमा नहीं किया, उन्हें विद्यालय परिसर में प्रवेश से वंचित कर दिया गया।
वायरल वीडियो में सामने आए तथ्य
सनसनीखेज मामला: सिद्धार्थनगर में फेयरवेल फीस न देने पर छात्रों को स्कूल में नहीं मिला प्रवेश। बाहर खड़े छात्रों का वीडियो हुआ वायरल, शिक्षा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल।#Siddharthnagar #StudentRights #SchoolNews #UPNews #ViralVideo pic.twitter.com/bhgzqhOHjS
— Webvarta News Agency (@webvarta) February 12, 2026
छात्रों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कई विद्यार्थी स्कूल गेट के बाहर खड़े हैं और प्रवेश न मिलने को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। यह वीडियो आज का बताया जा रहा है, जो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है।
| विवरण | जानकारी | स्थिति |
|---|---|---|
| विद्यालय | सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल, धरौली | निजी विद्यालय |
| कक्षा | 9वीं | प्रभावित |
| फेयरवेल शुल्क | ₹500 | अनिवार्य |
| कार्रवाई | प्रवेश से वंचित | विवादित |
- फीस न देने पर छात्रों को स्कूल में प्रवेश नहीं मिला।
- छात्रों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला।
- मामला अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित करना उचित नहीं है। निजी विद्यालयों में शुल्क को लेकर पारदर्शिता और संवेदनशीलता जरूरी है।
निष्कर्ष
सिद्धार्थनगर का यह मामला दर्शाता है कि शुल्क और आयोजनों को लेकर विद्यालयों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। फेयरवेल जैसे आयोजनों के नाम पर छात्रों के साथ भेदभाव भविष्य के लिए नकारात्मक संदेश देता है। प्रशासन को ऐसे मामलों में समय रहते हस्तक्षेप कर उचित समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
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