सिद्धार्थनगर, संदीप पाण्डेय | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नीचाफा क्षेत्र में स्थित बरघाट के हिंदू शक्ति स्थल श्री दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित ‘सनातन उद्घोष कथा महोत्सव’ इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है। यह भव्य धार्मिक आयोजन 14 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 22 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
14 फरवरी से 22 फरवरी तक चलेगा महोत्सव
इस सनातन उद्घोष कथा महोत्सव की मुख्य कथावाचिका साध्वी सरस्वती हैं, जो अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से धर्म, संस्कार और सामाजिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार कर रही हैं। आयोजन स्थल पर प्रतिदिन भजन-कीर्तन, कथा वाचन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
राम चरित्र और चरित्र निर्माण पर जोर
मीडिया से बातचीत के दौरान साध्वी सरस्वती ने कहा कि सनातन उद्घोष कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र पूरे विश्व में रामराज्य की स्थापना के लिए जाना जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा किसी जाति या वर्ग की नहीं होती, बल्कि चरित्र की पूजा होती है। मनुष्य का आचरण ही उसे श्रेष्ठ बनाता है और यही सनातन धर्म की मूल भावना है।
- राम चरित्र से जीवन में मर्यादा का संदेश
- संस्कार और नैतिकता पर विशेष बल
- व्यक्ति नहीं, समाज को श्रेष्ठ बनाने का उद्देश्य
- सनातन परंपराओं का संरक्षण
शंकराचार्य परंपरा और सामाजिक संदेश
साध्वी सरस्वती ने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं बन सकता, क्योंकि इसके लिए विशेष नियम, परंपराएं और तपस्या आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कुछ लोग स्वयं को श्रेष्ठ बताने की होड़ में लगे हुए हैं, जो समाज के लिए उचित नहीं है।
उन्होंने कुंभ मेले के दौरान देखे गए विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि गरमागरम माहौल में भी संयम और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
समाज को जोड़ने का प्रयास
साध्वी सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि उनका उद्देश्य स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करना नहीं, बल्कि समाज को श्रेष्ठ बनाना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे धर्म, संस्कार और सेवा भाव को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
कथा महोत्सव में स्थानीय नागरिकों, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है, जिससे सामाजिक समरसता को भी बल मिल रहा है।
निष्कर्ष
बढ़नीचाफा में आयोजित ‘सनातन उद्घोष कथा महोत्सव’ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रहा है, बल्कि समाज को नैतिकता, संयम और सद्भाव का संदेश भी दे रहा है। साध्वी सरस्वती के प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा मिल रही है।
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