पचपेड़वा (बलरामपुर), कमर खान | वेब वार्ता
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बलरामपुर जनपद के पचपेड़वा नगर स्थित प्राचीन शिवगढ़ धाम मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा एक सप्ताह पूर्व से ही साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
एक सप्ताह पहले से शुरू हुई तैयारियां
नगर पंचायत अध्यक्ष रवि वर्मा के नेतृत्व में महाशिवरात्रि से लगभग एक सप्ताह पूर्व ही मंदिर परिसर की विशेष साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, चूना छिड़काव और सजावट का कार्य प्रारंभ कर दिया गया था। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, बैठने की व्यवस्था और मार्गों की मरम्मत भी कराई गई।
इसके साथ ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं, ताकि रात्रिकालीन पूजा और जलाभिषेक के दौरान पर्याप्त रोशनी बनी रहे।
नगर पंचायत अध्यक्ष ने किया निरीक्षण
महाशिवरात्रि के दिन नगर पंचायत अध्यक्ष रवि वर्मा स्वयं अपने परिजनों के साथ शिवगढ़ धाम मंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य संसाधनों का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने नगर पंचायत कर्मियों को मंदिर परिसर में लगातार मुस्तैद रहने और श्रद्धालुओं की सहायता करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
- एक सप्ताह पूर्व से सफाई और सजावट कार्य
- पेयजल व प्रकाश की विशेष व्यवस्था
- रात्रिकालीन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
- नगर पंचायत कर्मियों की तैनाती
श्रद्धालुओं ने की व्यवस्थाओं की सराहना
महाशिवरात्रि पर मंदिर में उमड़ी भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुचारू रहीं। वरिष्ठ समाजसेवी संतोष भगत, गिरी बाबा, संतोष मोदनवाल, रमन चंदेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर नगर पंचायत द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना की।
श्रद्धालुओं का कहना था कि इस वर्ष मंदिर परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा और सुविधा के बेहतर इंतजाम किए गए, जिससे पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सकी।
निष्कर्ष
शिवगढ़ धाम मंदिर में महाशिवरात्रि का आयोजन प्रशासन और स्थानीय निकाय की सक्रियता का उदाहरण बना। समय पर की गई तैयारियों और प्रभावी प्रबंधन से श्रद्धालुओं को सुविधाजनक वातावरण मिला। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ बेहतर प्रशासनिक समन्वय का भी प्रतीक रहा।
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