एटा, सुनील यादव | वेब वार्ता
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक अनिवार्य किए जाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने माध्यमिक एवं मूलभूत शिक्षा राज्य मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप का आग्रह किया है। आयोग सदस्य ने विभिन्न जनपदों के भ्रमण के दौरान प्राप्त शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि कई निजी विद्यालय एनसीईआरटी के स्थान पर महंगी और स्वनिर्धारित पुस्तकों का उपयोग करवा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शैक्षिक समानता और पारदर्शिता के लिए पूरे प्रदेश में एकरूप पाठ्यक्रम व्यवस्था लागू होना आवश्यक है।
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक अनिवार्य करने की मांग
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक अनिवार्य करने के संबंध में भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि एक ही कक्षा के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग और महंगी किताबें निर्धारित करना शिक्षा के मूल उद्देश्य के विपरीत है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभिभावकों को विशेष कठिनाई होती है।
- एनसीईआरटी आधारित समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए
- महंगी निजी प्रकाशनों की अनिवार्यता समाप्त हो
- शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित हों
- पारदर्शी और जनोन्मुख शिक्षा व्यवस्था विकसित हो
आयोग सदस्य ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तक आधारित ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए सह-पाठ्यक्रमीय और कौशलवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
वर्दी परिवर्तन पर भी जताई आपत्ति
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक अनिवार्य करने के साथ ही आयोग सदस्य ने विद्यालयी वर्दी से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में हर वर्ष वर्दी परिवर्तन की प्रवृत्ति अपनाई जाती है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है।
| मुद्दा | सुझाव |
|---|---|
| पाठ्यपुस्तक | एनसीईआरटी आधारित अनिवार्य पाठ्यक्रम |
| विद्यालयी वर्दी | कम से कम 5 वर्ष तक एक समान वर्दी |
| हाउस प्रणाली | न्यूनतम 3 वर्ष तक एक ही हाउस |
उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयी वर्दी को न्यूनतम पांच वर्षों तक यथावत रखा जाए, ताकि अभिभावकों को अनावश्यक व्यय से राहत मिल सके।
हाउस प्रणाली में बदलाव की सिफारिश
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक अनिवार्य करने के साथ ही ‘हाउस प्रणाली’ में बार-बार परिवर्तन की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की गई। आयोग सदस्य ने कहा कि प्रत्येक वर्ष हाउस बदलने से छात्रों को नई वर्दी अथवा अतिरिक्त सामग्री खरीदनी पड़ती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए समस्या बन जाती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि किसी भी छात्र या छात्रा को कम से कम तीन वर्षों तक एक ही हाउस में रखा जाए, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव न पड़े।
शैक्षिक समानता और पारदर्शिता पर जोर
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक अनिवार्य किए जाने से शिक्षा व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता बढ़ेगी। आयोग सदस्य ने विभाग से अपेक्षा की कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सभी निजी विद्यालयों में अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों का संरक्षण करना शासन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत, सुलभ और किफायती बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
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