हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
विश्व शांति शिक्षा कार्यक्रम के संस्थापक, विश्व शांति दूत एवं प्रख्यात लेखक–आध्यात्मिक संत डॉ. प्रेम रावत ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में “श्वास की कीमत” को पहचानना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्वास का महत्व तब समझ में आता है, जब वह रुकने लगती है। जीवन की सबसे बड़ी पूंजी श्वास है — इसे पहचानना ही आत्मज्ञान की पहली सीढ़ी है।
श्वास रुक जाए तो सब कुछ व्यर्थ
डॉ. रावत ने कहा कि जब कोई बच्चा जन्म लेता है, तो सबसे पहले यह देखा जाता है कि उसकी श्वास चल रही है या नहीं। यदि श्वास चलती है, तो उसे जीवन मिला कहा जाता है; अन्यथा उसे मिट्टी मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर इंसान जीवन रहते ही श्वास की अहमियत समझ ले, तो उसका जीवन अधिक सार्थक और संतुलित बन सकता है।
उन्होंने लोगों से कहा कि जीवन की दौड़-भाग के बीच यह न भूलें कि आपके भीतर की शांति ही असली शक्ति है।
हृदय में है सच्ची शांति
कन्हूयाकूबपुर गांव में आयोजित शीतकालीन शांति महोत्सव में हजारों लोगों ने डॉ. प्रेम रावत जी का शांति संदेश सुना। कार्यक्रम का आयोजन New Venture Team के तत्वावधान में premrawat.com और Timeless Today के बैनर तले किया गया। अंतिम दिन श्रोताओं की संख्या तीन हजार के पार पहुंच गई।
डॉ. रावत ने कहा — “जिस सुख और शांति की तलाश में मनुष्य बाहर भटकता है, वह वास्तव में उसके अपने हृदय के भीतर ही मौजूद है।”
उन्होंने एक मार्मिक कविता के माध्यम से कहा — “आए एक ही देश से, उतरे एक ही घाट, हवा लगी संसार की, हो गए बारह बाट।” उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल करने के बजाय “जानने” में विश्वास करना चाहिए।
ग्राम प्रधानों का सम्मान, पुस्तकें भेंट
कार्यक्रम के दौरान दर्जन भर ग्राम प्रधानों का स्वागत किया गया और उन्हें “स्वयं की आवाज” पुस्तक भेंट की गई। स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक संभाला और प्रचार टीम के प्रयासों की आयोजकों ने सराहना की।
कार्यक्रम के अंतिम दिन स्वागत एवं संचालन बृजराज कुशवाहा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मनोज गुप्ता (हरदोई) द्वारा किया गया।
सांसद मुकेश राजपूत ने सराहा डॉ. प्रेम रावत का संदेश
शांति महोत्सव के अंतिम दिन सांसद मुकेश राजपूत ने श्रोताओं से अपील की कि वे विश्व शांति दूत डॉ. प्रेम रावत द्वारा बताए मार्ग पर चलें। उन्होंने कहा कि विश्व शांति की स्थापना के लिए डॉ. रावत जी के प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार पी.के. गुप्ता के मार्गदर्शन में सांसद का भव्य स्वागत किया गया। फर्रुखाबाद एवं हरदोई की टीम द्वारा उन्हें शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और डॉ. प्रेम रावत जी की पुस्तकें — “फाइव रैंकिंग”, “स्वयं की आवाज” और “श्वास” — भेंट की गईं।
- डॉ. प्रेम रावत ने कहा — जीवन का अर्थ श्वास की कीमत को समझने में है।
- कन्हूयाकूबपुर गांव में हजारों लोगों ने सुना शांति का संदेश।
- ग्राम प्रधानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मान।
- सांसद मुकेश राजपूत ने डॉ. रावत के कार्यों की सराहना की।
डॉ. प्रेम रावत का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू को समझने की प्रेरणा देता है — कि जब तक श्वास है, तब तक जीवन है, और जब तक जीवन है, तब तक शांति की खोज जारी रहनी चाहिए।
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