Sunday, February 15, 2026
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टिकारी बना शोपीस, एक साल से डॉक्टर-नर्स नदारद

हरदोई, लक्ष्मी कान्त पाठक (वेब वार्ता)। विकासखंड कछौना की ग्राम पंचायत टिकारी में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में भारी अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता आरबी सिंह तोमर उर्फ बबलू ने इस संबंध में जिलाधिकारी हरदोई को शिकायती पत्र भेजकर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति से अवगत कराया है।

सुविधा के नाम पर उपेक्षा का अड्डा

टिकारी PHC को क्षेत्रीय विधायक रामपाल वर्मा के प्रयासों से ग्रामीणों की सुविधा हेतु खोला गया था। यह केंद्र लगभग एक लाख की आबादी को चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए बना, लेकिन अब यह इमारत एक शोपीस मात्र बनकर रह गई है।

फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे इस केंद्र पर पिछले एक साल से न कोई डॉक्टर तैनात है, न कोई स्टाफ नर्स। स्थिति यह है कि मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रहीं और गर्भवती महिलाओं के लिए यह संकट और भी गंभीर हो गया है।

बालामऊ फाटक बंद होने पर जान जोखिम में

यह क्षेत्र बालामऊ जंक्शन रेलवे फाटक से कटता है, जो अक्सर बंद रहता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कछौना नहीं ले जाया जा पाता। कई बार गर्भवती महिलाएं रास्ते में ही फंसी रह जाती हैं, जिससे अनहोनी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

गंदगी, गैरहाजिरी और झोलाछाप का कब्जा

शिकायती पत्र के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में गंदगी का अंबार है। कर्मचारी समय से नहीं आते और ड्यूटी में लापरवाही आम बात है। डॉक्टर और नर्स की गैरमौजूदगी में मरीज झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंस रहे हैं।

सामाजिक आक्रोश

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई यह स्वास्थ्य इकाई अब व्यवस्था की लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है। गांव के लोग न इलाज मिलने से त्रस्त हैं और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

जिलाधिकारी से की गई मांग

आरबी सिंह तोमर ने पत्र में मांग की है कि, तत्काल डॉक्टर और स्टाफ नर्स की तैनाती की जाए। नियमित सफाई और स्टाफ उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। फाटक की समस्या को ध्यान में रखते हुए टिकारी PHC को 24 घंटे चालू किया जाए।

टिकारी का यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जहां ग्रामीणों को संजीवनी देने के लिए बनाया गया था, अब खुद बीमार व्यवस्था का शिकार हो चुका है। यदि प्रशासन ने समय रहते संज्ञान नहीं लिया, तो यह उपेक्षा और अनहोनी की कीमत आम जनता को चुकानी पड़ेगी।

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