एटा, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
एटा जनपद स्थित पटना पक्षी विहार ने एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 की पहली गणना में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस गणना के दौरान कुल 4705 जलीय पक्षियों को रिकार्ड किया गया, जिनमें 56 विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह आंकड़े पटना पक्षी विहार की उत्कृष्ट पारिस्थितिकी और संरक्षण प्रयासों का प्रमाण हैं।
वेटलैंड्स इंटरनेशनल के तहत हुआ गणना कार्यक्रम
एशियन वाटरबर्ड सेंसस-26 के अंतर्गत यह गणना वेटलैंड्स इंटरनेशनल के वैश्विक कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई। उत्तर प्रदेश में इस कार्यक्रम का संचालन वेटलैंड्स इंटरनेशनल के राज्य समन्वयक नीरज श्रीवास्तव के निर्देशन में किया गया। गणना कार्य बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) एवं नेशनल चंबल सैंक्चुरी प्रोजेक्ट के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
विशेषज्ञों और वन विभाग की संयुक्त टीम रही शामिल
बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के. पी. सिंह के नेतृत्व में यह गणना की गई। टीम में अनुज यादव, अब्दुल कलाम सहित वन दरोगा शिलेंद्र पाल, श्वेता पाल तथा वन रक्षक दीपशिखा और ममताज कुमार शामिल रहे। सभी सदस्यों ने वैज्ञानिक पद्धति से पक्षियों की पहचान और संख्या दर्ज की।
56 प्रजातियों में 27 प्रवासी और 29 आवासीय पक्षी
गणना के दौरान कुल 56 प्रजातियों के जलीय पक्षियों की पहचान की गई। इनमें 27 प्रवासी प्रजातियां तथा 29 आवासीय (स्थानीय) प्रजातियां शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का संतुलित अनुपात किसी भी वेटलैंड के स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र का संकेत होता है।
ये भी पढ़ें: पटना पक्षी विहार में पहली बार होगी जलीय पक्षियों की गणना, वेटलैंड की क्षमता का होगा आंकलन
संकटग्रस्त पक्षियों की 9 प्रजातियां दर्ज
पटना पक्षी विहार में की गई गणना के दौरान संकटग्रस्त पक्षियों की कुल 9 प्रजातियां भी रिकार्ड की गईं। इनमें सारस क्रेन, ओपन बिल स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक हेडेड आइबिस, कॉमन पोचार्ड, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, ओरिएंटल डार्टर, फेरुगिनस डक और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल शामिल हैं। इन प्रजातियों की मौजूदगी इस क्षेत्र के संरक्षण महत्व को और भी बढ़ाती है।
नोर्दन पिनटेल की संख्या सर्वाधिक
गणना में सबसे अधिक संख्या नोर्दन पिनटेल की दर्ज की गई, जिसकी कुल संख्या 1270 रही। इसके बाद कॉमन टील (458), नोर्दन शोवलर (432), गेडवाल (369) और कॉमन कूट (295) की उल्लेखनीय संख्या पाई गई। इसके अतिरिक्त बार-हेडेड गूज (120), ग्रे-लैग गूज (60), ग्रेटर कॉर्मोरेंट (87), कॉम्ब डक (75) और यूरेशियन विजन (20) सहित कई अन्य प्रजातियां भी रिकार्ड की गईं।
- कुल जलीय पक्षी: 4705
- कुल प्रजातियां: 56
- प्रवासी प्रजातियां: 27
- आवासीय प्रजातियां: 29
- संकटग्रस्त प्रजातियां: 9
सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे का महत्वपूर्ण स्टॉपओवर
बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के. पी. सिंह ने बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवासी पक्षियों का आगमन मुख्य रूप से सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे के माध्यम से होता है। पटना पक्षी विहार इस फ्लाई-वे का एक महत्वपूर्ण स्टॉपओवर वेटलैंड है, जहां प्रवासी पक्षियों की प्रजातीय विविधता और संख्या दोनों ही उच्च स्तर पर पाई जाती हैं। यह वेटलैंड की अच्छी स्वास्थ्य स्थिति का स्पष्ट संकेत है।
प्रबंधन और संरक्षण के सकारात्मक परिणाम
नेशनल चंबल सैंक्चुरी प्रोजेक्ट की डीएफओ चांदनी सिंह ने बताया कि पटना पक्षी विहार में वेटलैंड प्रबंधन और संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जल स्तर प्रबंधन, मानव हस्तक्षेप पर नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब पक्षी गणना में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
प्रवासी पक्षियों के लिए बढ़ाई गई निगरानी
रेंज ऑफिसर मनीषा कुकरेती ने बताया कि प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित आवास के लिए अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। हेबिटाट मैनेजमेंट के तहत जल स्तर का संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिल सके।
👉 हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें – Web Varta
ये भी पढ़ें: पटना पक्षी विहार में पहली बार होगी जलीय पक्षियों की गणना, वेटलैंड की क्षमता का होगा आंकलन




