पडरौना नगरपालिका में टकराव: बोर्ड बैठक के बाद धरना, प्रशासनिक असंतुलन पर बढ़ा विवाद

कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

पडरौना नगरपालिका प्रशासनिक असंतुलन का मामला शनिवार को उस समय खुलकर सामने आया जब बोर्ड बैठक के बाद नगराध्यक्ष और सभासदों के बीच विवाद गहरा गया। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना नगरपालिका परिषद में अधिकार, सम्मान और सहभागिता को लेकर मतभेद इस कदर बढ़े कि कई सभासदों को नगरपालिका भवन पर धरना और विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। करीब पांच घंटे चली बैठक के बाद सभासदों ने रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिससे प्रशासनिक कामकाज पर सवाल खड़े हो गए।

पडरौना नगरपालिका प्रशासनिक असंतुलन: विवाद की जड़ क्या है?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नगराध्यक्ष विनय जायसवाल और विभिन्न वार्डों से निर्वाचित सभासदों के बीच समन्वय की कमी लंबे समय से बनी हुई थी। सभासदों का आरोप है कि बोर्ड बैठकों में उनकी सहभागिता और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। वहीं, नगराध्यक्ष का कहना है कि बैठकें पूरी तरह नियमों के अनुरूप संचालित की जा रही हैं।

शनिवार शाम आयोजित बोर्ड बैठक एएसडीएम की मौजूदगी में शुरू हुई और लगभग पांच घंटे तक चली। लेकिन पडरौना नगरपालिका प्रशासनिक असंतुलन का मुद्दा तब और गहरा गया जब सभासदों ने आरोप लगाया कि नियमों के विरुद्ध प्रस्ताव पारित कराने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी के चलते बैठक को स्थगित करना पड़ा।

धरना और विरोध प्रदर्शन में शामिल सभासद

धरना और विरोध प्रदर्शन में अमतुल्लाह अंसारी, विपिन सिंह, बलवंत, सौरभ सिंह, पीयूष सिंह, संजय चौधरी, क्यामुद्दीन, मैनुद्दीन, प्रमोद श्रीवास्तव और अरुण कुशवाहा समेत कई सभासद मौजूद रहे। सभासदों का कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए और किसी भी प्रस्ताव को नियमों से परे जाकर पारित नहीं किया जा सकता।

नगराध्यक्ष का पक्ष: आरोप निराधार

नगर पालिका अध्यक्ष विनय जायसवाल ने सभासदों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “बोर्ड की बैठक नियमानुसार हो रही थी। कुछ सभासद दबाव बनाकर नियम विरुद्ध प्रस्ताव पास कराना चाहते थे, इसलिए बैठक स्थगित करनी पड़ी। सभासदों के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।”

लोकतांत्रिक संतुलन की परीक्षा

नगर के वरिष्ठ नागरिकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि पडरौना नगरपालिका प्रशासनिक असंतुलन केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की परीक्षा है। चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच संतुलन, सम्मान और अधिकारों की स्पष्टता बेहद आवश्यक है, ताकि विकास कार्य बाधित न हों।

मुख्य बिंदुविवरण
स्थानपडरौना नगरपालिका परिषद, कुशीनगर
विवाद का कारणअधिकार और प्रस्ताव पारित करने को लेकर मतभेद
बैठक अवधिलगभग 5 घंटे
परिणामबैठक स्थगित, धरना प्रदर्शन

जनता की नजर समाधान पर

जनता अब इस विवाद के शीघ्र समाधान की उम्मीद कर रही है। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों की गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यदि पडरौना नगरपालिका प्रशासनिक असंतुलन का समाधान संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा असर नगर के विकास और जनहित योजनाओं पर पड़ सकता है।

सभी पक्षों से अपील की जा रही है कि आपसी मतभेद भुलाकर वार्ता के माध्यम से समाधान खोजें, ताकि नगर का प्रशासनिक ढांचा मजबूत हो और जनता का विश्वास बना रहे।

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