नई दिल्ली, अजय कुमार | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के बारा फी प्लाज़ा पर राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ता के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की घटना ने टोल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने यूज़र शुल्क संग्रहण एजेंसी एम/एस स्काईलार्क इन्फ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।
क्या है बारा टोल प्लाज़ा विवाद
14 जनवरी 2026 को एनएच-731 के लखनऊ–सुल्तानपुर खंड पर स्थित बारा फी प्लाज़ा पर एक वाहन चालक के साथ टोल कर्मियों द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई। घटना सामने आने के बाद वीडियो और शिकायतों के आधार पर मामला तूल पकड़ गया। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि एजेंसी के कर्मियों ने अनुबंध में तय आचार संहिता का खुला उल्लंघन किया।
NHAI का सख्त फैसला: अनुबंध रद्द
NHAI ने इसे अनुबंधीय दायित्वों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए यूज़र शुल्क संग्रहण अनुबंध को समाप्त करने का निर्णय लिया। प्राधिकरण का कहना है कि टोल प्लाज़ा पर तैनात किसी भी कर्मी द्वारा आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार अस्वीकार्य है और ऐसी घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं।
कारण बताओ नोटिस और डिबार करने की तैयारी
अनुबंध समाप्त करने के साथ ही संबंधित एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में एजेंसी से पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा गया है और प्रस्ताव रखा गया है कि उसे एक वर्ष की अवधि के लिए NHAI की किसी भी निविदा या अनुबंध में भाग लेने से वंचित किया जाए।
₹5.3 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त
NHAI ने बारा फी प्लाज़ा के मौजूदा अनुबंध के तहत जमा की गई ₹5.3 करोड़ की बैंक गारंटी और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी को जब्त करने और भुनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। प्राधिकरण का मानना है कि यह कदम एजेंसी की लापरवाही और पर्यवेक्षण में विफलता को देखते हुए पूरी तरह उचित है।
- यूज़र शुल्क संग्रहण अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त
- एक वर्ष के लिए एजेंसी को डिबार करने का प्रस्ताव
- ₹5.3 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त
- टोल प्लाज़ाओं पर कदाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता
निष्कर्ष: टोल एजेंसियों के लिए कड़ा संदेश
बारा फी प्लाज़ा प्रकरण के बाद NHAI का यह कदम सभी टोल एजेंसियों के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार और अनुबंधीय शर्तों का पालन अनिवार्य है। किसी भी तरह की गुंडागर्दी, दुर्व्यवहार या लापरवाही पर न केवल अनुबंध खत्म होगा, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान और ब्लैकलिस्टिंग भी तय है।
हमारे व्हाट्सएप्प चैनल को फॉलो करें
ये भी पढ़ें: एटा में एनएच-91 पर अवैध होर्डिंग्स का कब्जा: दिशा सूचक बोर्ड बने पान मसाला विज्ञापन का अड्डा




