हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर रविवार को मेहंदी घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह-सुबह “हर हर गंगे” और “गंगा मईया की जय” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सुबह से ही घाट पर उमड़ी आस्था की भीड़
सूर्योदय से पहले ही कन्नौज, सीतापुर, हरदोई और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेहंदी घाट पहुंचने लगे। महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे सभी ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ गंगा में स्नान किया। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और आरती कर अपनी आस्था प्रकट की। दिन भर घाट पर भक्ति संगीत, भजन और मंत्रोच्चार की ध्वनि गूंजती रही।
प्रशासन ने रखी सतर्कता, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
प्रशासन की ओर से घाटों पर पुलिस बल, गोताखोर और स्वयंसेवक तैनात किए गए। भीड़ प्रबंधन के लिए वाहनों के मार्ग में रूट डायवर्जन लागू किया गया। साफ-सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासनिक अधिकारी दिनभर घाट का भ्रमण करते रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी की।
आस्था और अनुशासन का संगम
जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, घाट पर भीड़ बढ़ती रही, परंतु श्रद्धालुओं ने शांति और अनुशासन बनाए रखा। पूरे दिन गंगा स्नान का क्रम चलता रहा और देर शाम तक श्रद्धालु गंगा आरती में सम्मिलित होते रहे। पूरा क्षेत्र धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। मेहंदी घाट पर यह आयोजन हरदोई की धार्मिक परंपरा और जन-आस्था का सुंदर उदाहरण बन गया।
- हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी।
- प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम।
- घाट पर स्वच्छता, रोशनी और गोताखोरों की तैनाती।
निष्कर्ष: आस्था, अनुशासन और प्रशासन का संगम
मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर मेहंदी घाट पर उमड़ी भीड़ ने आस्था और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रशासन की सजगता और श्रद्धालुओं की अनुशासित सहभागिता ने इस पर्व को सफल बनाया। भक्ति और सेवा का यह संगम हरदोई की गंगा तट संस्कृति का जीवंत चित्र बन गया।
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