सिद्धार्थनगर, सन्दीप पाण्डेय | वेब वार्ता
सिद्धार्थनगर जनपद में स्थित मझौली सागर को रामसर साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासन ने तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं। जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी.एन. ने संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति और संभावनाओं का जायजा लिया।
कुलपति के सुझाव पर शुरू हुई पहल
यह पहल सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह के सुझाव पर शुरू की गई है। इसके तहत मझौली सागर को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। निरीक्षण के दौरान प्रभागीय वनाधिकारी, अधिशासी अभियंता ड्रेनेज खंड, पर्यटन विभाग, तहसीलदार नौगढ़ तथा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
प्रारंभिक अध्ययन में जैव विविधता का खुलासा
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष कुमार वर्मा ने बताया कि परियोजना के लिए प्रारंभिक वैज्ञानिक अध्ययन पूरा कर लिया गया है। इस अध्ययन में क्षेत्र की वनस्पति एवं पक्षी प्रजातियों का विस्तृत सर्वे किया गया है।
| विवरण | आंकड़े | स्थिति |
|---|---|---|
| वनस्पति प्रजातियां | 143 | सूचीबद्ध |
| पक्षी प्रजातियां | 30 | पहचान की गई |
| प्रस्तावित श्रेणी | कैटेगरी-बी | प्रक्रियाधीन |
- प्रारंभिक अध्ययन पूर्ण किया गया है।
- 143 वनस्पति और 30 पक्षी प्रजातियां चिन्हित।
- रामसर कैटेगरी-बी में शामिल करने की तैयारी।
जल संरक्षण और इको-टूरिज्म पर जोर
अधिशासी अभियंता ड्रेनेज खंड ने बताया कि सागर की जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए डि-सिल्टिंग परियोजना तैयार की जा रही है। रामसर साइट बनने से जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय किसानों को सिंचाई सुविधा का भी लाभ होगा।
सीमा क्षेत्र में पर्यटन की बढ़ेंगी संभावनाएं
मझौली सागर भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है। रामसर साइट में शामिल होने से यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और दोनों देशों से पर्यटकों के आगमन में वृद्धि की संभावना है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
मझौली सागर को रामसर साइट के रूप में विकसित करने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें, तो यह क्षेत्र आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मानकों का प्रमुख पर्यटन और संरक्षण केंद्र बन सकता है।
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