ललितपुर, आलोक चतुर्वेदी | वेब वार्ता
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े प्रस्तावित संशोधन बिल को लेकर ललितपुर में विरोध दर्ज कराया गया। स्वर्ण आर्मी, युवा ब्राह्मण महामण्डल, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और श्री दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस बिल को वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से सौंपा।
किन संगठनों ने सौंपा ज्ञापन
| क्रम | संगठन का नाम |
|---|---|
| 1 | स्वर्ण आर्मी |
| 2 | युवा ब्राह्मण महामण्डल |
| 3 | अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा |
| 4 | श्री दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति (रजि.) |
संगठनों का कहना है कि यूजीसी द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन/नए नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में असमानता और भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे सामाजिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका है।
बिल को लेकर संगठनों की आपत्तियां
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यह प्रस्तावित कानून अपने वर्तमान स्वरूप में एकपक्षीय प्रतीत होता है और इससे कुछ वर्गों के छात्रों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संगठनों का कहना है कि शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर देना होना चाहिए।
- नीति निर्धारण समितियों में सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व का अभाव
- संविधान की समानता और सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत प्रावधान
- झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान न होना
- भविष्य में दूरगामी नकारात्मक प्रभाव की आशंका
संगठनों ने आरोप लगाया कि झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव अनावश्यक विवादों को बढ़ावा दे सकता है, जिससे शिक्षा संस्थानों में असंतुलन उत्पन्न होगा।
ज्ञापन सौंपते समय प्रमुख लोग रहे मौजूद
| संगठन | प्रतिनिधि |
|---|---|
| स्वर्ण आर्मी | राज रावत (जिलाध्यक्ष) |
| युवा ब्राह्मण महामण्डल | राजेश दुबे (अध्यक्ष) |
| क्षत्रिय महासभा | जितेन्द्र सिंह, सत्येन्द्र प्रताप सिंह सिसौदिया |
| अन्य | शिवम पाराशर, डॉ. शरद तिवारी, विक्की राजा, पवन राजा, रवि प्रताप सिंह सहित अन्य |
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।
निष्कर्ष
यूजीसी संशोधन बिल को लेकर उठी यह आवाज दर्शाती है कि उच्च शिक्षा से जुड़े नीतिगत निर्णयों पर व्यापक संवाद और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाते हैं।
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