ट्रेन की टक्कर से चार पहिया वाहन के परखच्चे उड़े, डिरेल होने से बाल-बाल बची ट्रेन

  • लोको पायलट की सूझबूझ से ट्रेन डिरेल होने से बची ट्रेन

    कुशीनगर, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गोरखपुर-नरकटियागंज रेलखंड पर रविवार रात एक गंभीर हादसा होते-होते टल गया। खड्डा रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर, बंजारी पट्टी गांव के पास मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के पुल पर एक चार पहिया वाहन (यूपी 57 बी 8444) के साथ ट्रेन की जोरदार टक्कर हुई, जिससे वाहन के परखच्चे उड़ गए। ट्रेन के लोको पायलट की सूझबूझ से ट्रेन डिरेल होने से बच गई, और एक बड़ा हादसा टल गया।

घटना का विवरण

रविवार रात करीब 9:00 बजे, एक सवारी गाड़ी खड्डा रेलवे स्टेशन से मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के पुल की ओर बढ़ रही थी। उसी समय रेलवे ट्रैक पर पहले से खड़ा एक चार पहिया वाहन ट्रेन से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वाहन में सवार लोग समय रहते कूदकर भाग निकले, जिससे उनकी जान बच गई। लोको पायलट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ट्रेन को नियंत्रित किया, जिससे ट्रेन पटरी से नहीं उतरी। इस घटना से रेल संचालन कुछ घंटों के लिए बाधित रहा, लेकिन कड़ी मेहनत के बाद सामान्य स्थिति बहाल कर ली गई।

स्थानीय लोगों की आशंका और साजिश की अफवाहें

स्थानीय लोगों ने इस घटना को संदिग्ध बताया और सवाल उठाया कि अंडरपास उपलब्ध होने के बावजूद वाहन रेलवे ट्रैक पर कैसे पहुंचा। कुछ लोगों ने इसे ट्रेन को डिरेल करने की साजिश का हिस्सा होने की आशंका जताई। क्षेत्र में ऐसी अफवाहों ने जोर पकड़ा है, खासकर हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश में ट्रेन डिरेलमेंट की कोशिशों की घटनाओं के मद्देनजर। उदाहरण के लिए, कानपुर में हाल ही में ट्रैक पर सिलेंडर और पत्थर रखकर ट्रेनों को पलटने की कोशिशें सामने आई थीं।

पुलिस और रेलवे की कार्रवाई

पुलिस ने वाहन के नंबर (यूपी 57 बी 8444) के आधार पर वाहन स्वामी की पहचान करने और हादसे की जांच शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। रेलवे प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और अपनी जांच शुरू की है। यह घटना ट्रैक पर अनधिकृत वाहनों की मौजूदगी और सड़क-रेल क्रॉसिंग पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर करती है।

व्यापक संदर्भ

कुशीनगर में रेल हादसों का इतिहास रहा है। 2018 में दुदही रेलवे क्रॉसिंग पर एक स्कूल वैन के साथ ट्रेन की टक्कर में 13 बच्चों की मौत हो गई थी, जो मानव रहित क्रॉसिंग की समस्या को दर्शाता है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में ट्रेन डिरेलमेंट की कोशिशों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जैसे कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस और कालिंदी एक्सप्रेस के साथ हुए हादसे, जहां ट्रैक पर बाधाएं रखी गई थीं। ये घटनाएं रेलवे सुरक्षा और निगरानी पर सवाल उठाती हैं।

निष्कर्ष

लोको पायलट की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े रेल हादसे को टाल दिया, लेकिन यह घटना रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत वाहनों और संभावित साजिशों की गंभीरता को उजागर करती है। पुलिस और रेलवे प्रशासन की संयुक्त जांच से इस हादसे के पीछे की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

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