Saturday, January 31, 2026
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कुशीनगर में ऐतिहासिक क्षण: थाईलैंड की रॉयल नोबल कंसोर्ट (रानी) ने बुद्ध प्रतिमा पर चीवर चढ़ाकर विश्व शांति की कामना की

कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल कुशीनगर में गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक महत्व का दृश्य देखने को मिला, जब थाईलैंड की रॉयल नोबल कंसोर्ट (रानी) चखुन फ्रा सुनीनाथा बिलासकल्याणी अपने 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान बुद्ध की 6.1 मीटर लंबी लेटी हुई प्रतिमा पर चीवर अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की और विश्व शांति व मानव कल्याण की कामना की।

महापरिनिर्वाण मंदिर में विधिवत चीवर दान

कार्यक्रमसमयस्थान
थाई मोनेस्ट्री से प्रस्थानसुबह 7:30 बजेकुशीनगर
विशेष पूजा एवं चीवर दान प्रारंभ7:40 बजेमहापरिनिर्वाण मंदिर
पूजा कार्यक्रम समापन8:11 बजेमंदिर परिसर

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रानी ने महापरिनिर्वाण मंदिर में प्रवेश कर भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक चीवर चढ़ाया। पूजा कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु फ्रा सोमदेज द्वारा किया गया।

रामभार स्तूप पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

पूजा-अर्चना के पश्चात रानी अपने दल के साथ रामभार स्तूप पहुंचीं, जहां भगवान बुद्ध का महापरिनिर्वाण उपरांत अंतिम संस्कार हुआ था। यहां एसडीएम कसया डॉ. संतराज सिंह बघेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका औपचारिक स्वागत किया।

रानी ने रामभार स्तूप परिसर में आधे घंटे से अधिक समय बिताया और ध्यान व प्रार्थना में लीन रहीं। इस दौरान तहसीलदार कसया धर्मवीर सिंह सहित राजस्व विभाग की टीम मौजूद रही।

भारत-थाईलैंड बौद्ध संबंधों का प्रतीक दौरा

बिंदुविवरण
कुल प्रतिनिधिमंडल70 सदस्य
भारत यात्रा की शुरुआतबोधगया, जनवरी 2026
पूर्व गंतव्यसारनाथ
आगामी संभावित गंतव्यलुंबिनी (नेपाल)

रानी बुधवार को सड़क मार्ग से सारनाथ से कुशीनगर पहुंची थीं। इससे पहले थाईलैंड के पूर्व उप प्रधानमंत्री बोरवॉर्नसाक युवान्नो भी दो दिवसीय दौरे पर कुशीनगर पहुंचे थे। देर शाम कुशीनगर विधायक पी.एन. पाठक ने थाई मोनेस्ट्री पहुंचकर रानी को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

कड़ी सुरक्षा और सांस्कृतिक संदेश

रानी की यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ-साथ थाईलैंड की सुरक्षा एजेंसियां भी तैनात रहीं। यह यात्रा भारत और थाईलैंड के बीच बौद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने का प्रतीक मानी जा रही है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रानी दिन में थाई क्लिनिक का भी भ्रमण करेंगी। उनका यह दौरा बौद्ध तीर्थ स्थलों के प्रति गहरी श्रद्धा और वैश्विक शांति के संदेश को रेखांकित करता है।

निष्कर्ष

थाईलैंड की रॉयल नोबल कंसोर्ट की कुशीनगर यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारत-थाईलैंड के ऐतिहासिक बौद्ध संबंधों को भी नई ऊर्जा देती है। बुद्ध की शिक्षाओं के माध्यम से विश्व शांति और सहअस्तित्व का संदेश इस यात्रा का मूल उद्देश्य रहा।

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