कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
कुशीनगर रेल ट्रैक हादसा में बुधवार रात एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब हेडफोन लगाकर रेल पटरी पर बैठा 21 वर्षीय युवक पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसा यूपी-बिहार सीमा के पास उस समय हुआ, जब युवक अपने साथी के साथ ट्रैक पर बैठकर बातचीत कर रहा था। घटना में उसका साथी बाल-बाल बच गया। परिजनों ने किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से इंकार करते हुए शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इस कुशीनगर रेल ट्रैक हादसा ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक पर लापरवाही के खतरनाक परिणामों को सामने ला दिया है।
कुशीनगर रेल ट्रैक हादसा: कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, तमकुहीराज कस्बे के वार्ड नंबर 12 मालवीय नगर निवासी मनोहर के पुत्र 21 वर्षीय विवेक मद्धेशिया बुधवार रात यूपी-बिहार सीमा पर जलालपुर और तिनफेडिया के बीच स्थित करमैनी गाजी गांव में एक शादी समारोह में रोड लाइट लगाने का काम करने गए थे। कार्य समाप्त होने के बाद वह अपने एक साथी के साथ थावे–कप्तानगंज रेल लाइन के फाटक संख्या 14 के समीप ट्रैक पर बैठ गए।
बताया गया कि विवेक हेडफोन लगाकर किसी से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान थावे से गोरखपुर जा रही पैसेंजर ट्रेन संख्या 55035 वहां से गुजरी। युवक को ट्रेन के आने की आहट नहीं मिल सकी और वह सीधे उसकी चपेट में आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
साथी बाल-बाल बचा, पुलिस पहुंची मौके पर
हादसे के समय साथ मौजूद दूसरा युवक किसी तरह ट्रैक से हट गया और सुरक्षित बच गया। उसी ने घटना की सूचना आसपास के लोगों और परिजनों को दी। सूचना मिलते ही बिहार के कुचायकोट थाने की पुलिस और रेलकर्मी मौके पर पहुंचे।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मृतक का नाम | विवेक मद्धेशिया (21 वर्ष) |
| निवास | मालवीय नगर, तमकुहीराज |
| ट्रेन संख्या | 55035 (थावे–गोरखपुर पैसेंजर) |
| घटना स्थल | फाटक संख्या 14, थावे–कप्तानगंज रेल लाइन |
परिजनों ने किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से इंकार करते हुए शव अपने सुपुर्द ले लिया। बिना पोस्टमार्टम या अन्य औपचारिक कार्रवाई के अंतिम संस्कार कर दिया गया।
क्षेत्रीय थाना प्रभारी की प्रतिक्रिया
इस मामले में तरयासुजान थाने के प्रभारी निरीक्षक रामसहाय चौहान ने घटना की जानकारी से अनभिज्ञता जताई। उनका कहना था कि घटना दूसरे क्षेत्राधिकार में हुई है, इसलिए उन्हें इसकी सूचना नहीं मिल सकी। चूंकि हादसा यूपी-बिहार सीमा क्षेत्र में हुआ, इसलिए प्रारंभिक कार्रवाई बिहार पुलिस द्वारा की गई।
रेल ट्रैक पर लापरवाही बनी जानलेवा
विशेषज्ञों का कहना है कि हेडफोन लगाकर रेलवे ट्रैक पर बैठना या चलना अत्यंत खतरनाक है। ट्रेन की रफ्तार और आवाज का सही अंदाजा न लग पाने के कारण ऐसे हादसे बार-बार सामने आ रहे हैं। रेलवे प्रशासन समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाता है, लेकिन युवाओं में लापरवाही कम नहीं हो पा रही है।
- रेल ट्रैक पर बैठना या चलना कानूनन अपराध है।
- हेडफोन या मोबाइल के उपयोग से आसपास की आवाज सुनाई नहीं देती।
- ट्रेन की रफ्तार का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
- अचानक मोड़ या सिग्नल पर ट्रेन की आवाज कम सुनाई दे सकती है।
कुशीनगर रेल ट्रैक हादसा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि थोड़ी सी असावधानी जानलेवा साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से रेलवे ट्रैक के आसपास जागरूकता अभियान चलाने और युवाओं को सचेत करने की मांग की है।
परिवार में मातम, क्षेत्र में शोक
युवक की असमय मृत्यु से परिवार में मातम पसरा हुआ है। मोहल्ले और आसपास के इलाके में भी शोक की लहर है। शादी समारोह में काम करने गए युवक की इस तरह मौत ने सभी को झकझोर दिया है।
स्थानीय लोगों ने अपील की है कि रेलवे ट्रैक को बैठने या बातचीत करने का स्थान न समझें। प्रशासन और रेलवे विभाग से सुरक्षा संबंधी सख्ती बढ़ाने की भी मांग उठी है।
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