कुशीनगर, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पुलिस महकमे में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह अवसर इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि लगातार 31 वर्षों से यह परंपरा बंद थी।
दरअसल, 30 अगस्त 1994 को जन्माष्टमी की रात पुलिस विभाग को एक दिल दहला देने वाली त्रासदी का सामना करना पड़ा था। जंगल पार्टी के कुख्यात दस्युओं के साथ मुठभेड़ में कई पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे, जिसके बाद जिले की पुलिस ने यह पर्व मनाना बंद कर दिया था।
1994 की वह रात जिसने बदल दी परंपरा
जिले के गठन के शुरुआती साल में ही पुलिस लाइन में जन्माष्टमी के आयोजन की तैयारियां चल रही थीं। तभी कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के जंगल पचरुखिया में डकैतों के होने की खबर मिली।
एसओ राजेंद्र यादव और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अनिल पांडेय की टीम नाव से बांसी नदी पार कर बिहार के बरवा गांव पहुंची। लेकिन डकैतों ने उन्हें देख लिया और घात लगाकर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
इस मुठभेड़ में
एसओ अनिल पांडेय
एसओ राजेंद्र यादव
सिपाही नागेंद्र पांडेय
खेदन सिंह
विश्वनाथ यादव
परशुराम गुप्त
तथा नाविक भुखल शहीद हो गए।
घटना के बाद पडरौना कोतवाली और कुबेरस्थान थाने में शहीदों की याद में स्मृति द्वार बनाया गया। लेकिन इस दर्दनाक याद के कारण पुलिस ने जन्माष्टमी का पर्व मनाना पूरी तरह बंद कर दिया।
इस साल फिर बजेगी बधाई
अब एसपी संतोष कुमार मिश्र के निर्देश पर 2025 में 31 साल बाद जिले के सभी थानों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
थानों की पुलिस ने क्षेत्र के संभ्रांत लोगों को निमंत्रण देना शुरू कर दिया है और कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं।
एसपी संतोष कुमार मिश्र ने कहा,
“यह पर्व केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं, बल्कि पुलिस बल में भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस साल हम इसे पूरे उत्साह के साथ मनाएंगे।”
यह क्यों है खास?
31 साल बाद परंपरा की वापसी
शहीद पुलिसकर्मियों की याद में आयोजन
समाज और पुलिस के बीच जुड़ाव का अवसर






