कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की पडरौना सदर तहसील में लेखपालों की मनमानी चरम पर पहुंच गई है। कार्य समय पर न पूरा करने पर तहसीलदार द्वारा डांट सुनने के बाद लेखपालों ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने तहसीलदार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास कर दिया और अधिकारी को हटाने की मांग शुरू कर दी है। यह प्रस्ताव गैर-कानूनी माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, लेखपाल अधिकारी की बात नहीं मानते और उनके खिलाफ तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं।
यह पहली बार नहीं है। पूर्व तहसीलदार सुमित कुमार सिंह के समय भी लेखपालों ने इसी तरह विरोध किया था। जिले में चर्चा है कि पडरौना तहसील में कई लेखपाल वर्षों से जमे हैं। तीन साल की कार्यावधि पूरी होने पर वे एक-दो महीने के लिए दूसरे तहसील में ट्रांसफर कराकर फिर पडरौना लौट आते हैं। इसकी शिकायतें अखबारों में कई बार छपीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि कुछ अधिकारी इनके ट्रांसफर में सीधे-परोक्ष सहयोग करते हैं।
लेखपालों की मनमानी: कार्य न करने पर विरोध
पडरौना तहसील में ईमानदार अधिकारी आने पर निकम्मे कर्मचारी सबसे पहले विरोध करते हैं। सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारी भी पीठ पीछे साथ देते हैं। वर्तमान तहसीलदार ने लेखपालों से समय पर कार्य पूरा करने को कहा, लेकिन इसके बजाय लेखपालों ने निंदा प्रस्ताव पास कर दिया।
सूत्रों ने बताया, “लेखपाल अधिकारी की बात नहीं मानते। कार्य न करने पर डांट सुनकर वे अधिकारी हटाने की साजिश रचते हैं।”
पुराना पैटर्न: ट्रांसफर का खेल
पडरौना तहसील में कई लेखपाल 10-15 साल से जमे हैं। नियम के अनुसार, 3 साल बाद ट्रांसफर अनिवार्य है, लेकिन वे अस्थायी ट्रांसफर कराकर लौट आते हैं। इसकी शिकायतें हुईं, लेकिन जांच नहीं।
जिला प्रशासन से मांग है कि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जिला प्रशासन की चुप्पी
जिले में इस मामले पर चर्चा गरम है। अगर जांच हुई तो कई खुलासे हो सकते हैं।
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