कुशीनगर, संवाददाता | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में दुष्कर्म के बाद नाबालिग की गला दबाकर हत्या के जघन्य मामले में अदालत ने कठोरतम सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार द्वितीय की अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्यु होने तक कठोर आजीवन कारावास की सजा दी है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर पांच लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी, नारी गरिमा पर बताया गंभीर आघात
सजा सुनाते हुए न्यायालय ने बेहद संवेदनशील और कड़े शब्दों में टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि भारत में नारी की पूजा का विधान है और ऐसे देश में इस प्रकार का घृणित अपराध केवल एक मासूम का जीवन छीनना ही नहीं, बल्कि संपूर्ण नारीत्व की मर्यादा पर आघात है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी समाज के लिए घातक होगी।
अर्थदंड न देने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि आरोपी पांच लाख रुपये का अर्थदंड जमा नहीं करता है तो उसे दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि मृतका के पिता को प्रदान की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को कुछ हद तक आर्थिक सहायता मिल सके।
2015 की घटना, कॉलेज गई नाबालिग लौटी नहीं
विशेष शासकीय अधिवक्ता पॉक्सो एक्ट फूलबदन एवं अजय गुप्त ने बताया कि 9 सितंबर 2015 को वादी ने तुर्कपट्टी थाना में सूचना दी थी कि उनकी 16 वर्षीय भांजी सुबह करीब 10:30 बजे साइकिल से कॉलेज गई थी, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी। इसके बाद परिजनों द्वारा उसकी तलाश शुरू की गई।
गन्ने के खेत में मिला शव, पुलिस जांच में जुटी
देर शाम मठिया गांव के समीप एक गन्ने के खेत में नाबालिग का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मोबाइल फोन, पर्स और चप्पल भी मिले। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने डॉग स्क्वॉड की सहायता से जांच प्रारंभ की।
डॉग स्क्वॉड से आरोपी तक पहुंची पुलिस
डॉग स्क्वॉड ने घटनास्थल पर मिले सामान को सूंघते हुए गांव के छोटेलाल मुसहर के घर तक सुराग दिया। पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि घटनास्थल पर मिला मोबाइल और पर्स आरोपी का ही था।
साक्ष्य और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध
पुलिस ने सभी आवश्यक साक्ष्य संकलित कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
- दुष्कर्म के बाद नाबालिग की निर्मम हत्या
- मृत्यु तक कठोर आजीवन कारावास की सजा
- ₹5 लाख का अर्थदंड, 80% पीड़ित परिवार को
- 2015 की घटना, डॉग स्क्वॉड से खुला मामला
- साक्ष्यों और गवाहों से दोष सिद्ध
न्यायालय का यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे जघन्य अपराधों में दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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