कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थ स्थल कुशीनगर में रविवार को साउथ कोरिया से आए 520 सदस्यीय बौद्ध श्रद्धालुओं के दल ने भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली का दर्शन-पूजन किया। श्रद्धालुओं ने परंपरागत कोरियाई विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की।
वैशाली से सड़क मार्ग द्वारा कुशीनगर पहुंचे श्रद्धालु
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोरियाई श्रद्धालुओं का यह दल रविवार सुबह करीब आठ बजे वैशाली से सड़क मार्ग द्वारा रवाना हुआ और लगभग 11 बजे महापरिनिर्वाण मंदिर परिसर पहुंचा। यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में ध्यान और साधना के साथ पूजा की तैयारी शुरू की।
महापरिनिर्वाण मंदिर में तीन घंटे चली विशेष पूजा
बौद्ध गुरु वेनेरेबल पंक्यून सुनिम के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने कोरियाई परंपरा के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना की, जो लगभग तीन घंटे तक चली। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा पर चीवर अर्पित कर विधिवत पूजन किया।
रामाभार स्तूप में किया अंतिम संस्कार स्थल का दर्शन
महापरिनिर्वाण मंदिर के दर्शन के बाद कोरियाई श्रद्धालुओं का दल रामाभार स्तूप पहुंचा। यहां भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद हुए अंतिम संस्कार स्थल पर बने स्तूप की परिक्रमा कर विशेष प्रार्थना की गई। श्रद्धालुओं ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण बताया।
स्तूपों, विहारों और पुरातात्विक स्थलों का किया भ्रमण
कुशीनगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्तूपों, विहारों और पुरातात्विक अवशेषों का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने भगवान बुद्ध के जीवन, उपदेशों और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
- 520 सदस्यीय कोरियाई बौद्ध श्रद्धालुओं का दल
- महापरिनिर्वाण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना
- रामाभार स्तूप सहित प्रमुख स्थलों का भ्रमण
कुशीनगर दर्शन के बाद यह कोरियाई दल लुंबिनी के लिए रवाना हुआ। लुंबिनी से यह दल श्रावस्ती और संकिसा होते हुए दिल्ली पहुंचेगा। बौद्ध धर्म से जुड़े अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही से कुशीनगर की वैश्विक पहचान और धार्मिक पर्यटन को और मजबूती मिल रही है।








