कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में दिगंबर जैन मुनि बासु नंदी महाराज ने विधि-विधान से 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात वे फाजिलनगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर से बिहार के वैशाली के लिए शुक्रवार को पदयात्रा पर रवाना हो गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के अनुयायी उपस्थित रहे।
1400 किलोमीटर की पदयात्रा कर पहुंचे फाजिलनगर
जानकारी के अनुसार, जैन मुनि बासु नंदी महाराज अपने शिष्यों के साथ महाराष्ट्र के औरंगाबाद से लगभग 1400 किलोमीटर की पदयात्रा कर बुधवार देर शाम फाजिलनगर (कुशीनगर) पहुंचे थे। यहां उन्होंने दिगंबर जैन मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई।
जैन धर्म के सिद्धांतों पर दिया संदेश
मुनि बासु नंदी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जैन धर्म के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “जियो और जीने दो” का संदेश आज के अशांत परिवेश में अत्यंत प्रासंगिक है। जीवों पर दया, शाकाहारी भोजन, सत्य और अहिंसा ही समाज में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
आत्मिक शांति और संयम पर जोर
उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती अशांति का प्रमुख कारण आत्मिक अशांति है। आत्म-अनुशासन ही मनुष्य की सच्ची पूंजी है। भौतिकतावादी युग में भी संयम, सादगी, अहिंसा और नैतिक मूल्यों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
पदयात्रा का उद्देश्य और दिनचर्या
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल पदयात्रा दूरी | लगभग 1400 किलोमीटर |
| दैनिक पदयात्रा | करीब 30 किलोमीटर |
| विश्राम | सूर्यास्त के पश्चात जहां पहुंचते हैं वहीं |
| मुख्य उद्देश्य | नैतिक मूल्यों की स्थापना और आत्मशुद्धि |
मुनि महाराज ने बताया कि उनकी पदयात्रा का उद्देश्य मानव समाज को नैतिक मूल्यों की ओर जागृत करना और आत्मशुद्धि के मार्ग पर प्रेरित करना है।
पावन स्थल कुशीनगर का जैन धर्म में महत्व
उन्होंने कुशीनगर (पावानगर) को भगवान महावीर स्वामी से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताया। दिगंबर जैन परंपरा में इस क्षेत्र का विशेष धार्मिक महत्व है, जहां श्रद्धालु आस्था और साधना के लिए दूर-दूर से आते हैं।
इनकी रही उपस्थिति
इस धार्मिक अवसर पर प्रगानंद, सर्वानंद, आत्मानंद, निजानंद सहित पुजारी अजय कुमार जैन, पुखराज जैन, डॉ. मनोज कुमार जैन, डॉ. मृत्युंजय कुमार ओझा, प्रेम कुमार, रानी जैन समेत अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
निष्कर्ष
जैन मुनि बासु नंदी महाराज की यह पदयात्रा और कुशीनगर में किया गया धार्मिक अनुष्ठान अहिंसा, संयम और नैतिकता के संदेश को सशक्त रूप से आगे बढ़ाता है। उनके प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और शांतिपूर्ण जीवन की प्रेरणा दी।








