Monday, January 26, 2026
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कुशीनगर एयरपोर्ट बना, उद्घाटन हुआ… पर उड़ानें नहीं, रेल कनेक्टिविटी भी अधूरी

कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने बीते एक दशक में करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण से लेकर कनेक्टिविटी और पर्यटन सुविधाओं के दावों के बावजूद कुशीनगर आज भी बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहा है।

चार साल बाद भी उड़ानें शुरू नहीं

कुशीनगर में करोड़ों रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनकर पूरी तरह तैयार है। अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री द्वारा इसके लोकार्पण के समय इसे पूर्वांचल और बौद्ध सर्किट के लिए ‘गेमचेंजर’ बताया गया था। दावा किया गया था कि यहां से बोधगया, सारनाथ, लुंबिनी, वैशाली जैसे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध स्थलों के लिए सीधी उड़ानें शुरू होंगी।

हालांकि, उद्घाटन के चार साल बाद भी हवाई अड्डे से नियमित यात्री उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं। न तो एयरलाइंस कंपनियों के साथ कोई ठोस समझौता सामने आया और न ही यात्रियों के लिए स्थायी उड़ान शेड्यूल घोषित किया गया। नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होने के बावजूद कुशीनगर की हवाई कनेक्टिविटी शून्य बनी हुई है।

रेल कनेक्टिविटी अब भी अधूरी

गोरखपुर के सरदारनगर से हेतिमपुर होते हुए कुशीनगर–पडरौना को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना वर्षों से लंबित है। हर बार परियोजना को लेकर आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन अब तक न तो सर्वे पूरा हो सका और न ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। आज भी कुशीनगर सीधे रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ पाया है, जबकि देश-विदेश से आने वाले अधिकांश पर्यटक रेल मार्ग को प्राथमिकता देते हैं।

बस सेवा के दावे, धरातल पर सन्नाटा

पर्यटन विभाग की ओर से यह भी दावा किया गया था कि कुशीनगर को बोधगया, सारनाथ, लुंबिनी और वैशाली से सीधी बस सेवा से जोड़ा जाएगा। लेकिन आज तक ऐसी कोई नियमित बस सेवा शुरू नहीं हो सकी। पर्यटक निजी टैक्सियों या अन्य साधनों पर निर्भर हैं, जिसके कारण वे कुशीनगर में ठहरने के बजाय सीधे अन्य गंतव्यों की ओर रवाना हो जाते हैं।

ई-कार्ट सेवा बंद, वाहन धूल फांक रहे

विश्व पर्यटन दिवस 2022 पर कसाडा (KASADA) द्वारा 29 लाख रुपये की लागत से चार ई-कार्ट वाहन खरीदे गए थे। इनका उद्देश्य बुजुर्ग, विदेशी और दिव्यांग पर्यटकों को बौद्ध स्थलों का आसान भ्रमण कराना था। लेकिन कुछ महीनों बाद ही यह सेवा बंद हो गई।

वर्तमान में ये ई-कार्ट वाहन निरस्त मैत्रेय परियोजना परिसर में धूल फांक रहे हैं। जेई प्रदीप चौरसिया ने बताया कि जेम पोर्टल के माध्यम से चालक और परिचालक की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल, विशेष अतिथियों के आने पर सीमित स्तर पर भ्रमण कराया जाता है।

सूचना केंद्र और पुलिस बूथ भी बंद

कुशीनगर मंदिर परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए बना सूचना केंद्र भी अधिकतर समय बंद रहता है। न यहां कोई गाइड उपलब्ध है और न ही सूचना सामग्री। वहीं पुलिस बूथ भी अक्सर खाली रहता है, जिससे खासकर विदेशी पर्यटकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ट्रांजिट पॉइंट बनकर रह गया कुशीनगर

स्थानीय होटल व्यवसायियों और टूर गाइडों का कहना है कि कुशीनगर में हर बजट वर्ग के पर्यटकों के लिए पर्याप्त ठहरने की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते पर्यटक कुछ घंटों के भ्रमण के बाद आगे बढ़ जाते हैं। लुंबिनी से आने वाले पर्यटक सीधे वैशाली चले जाते हैं, जबकि बोधगया से आने वाले सैलानी कुशीनगर रुकने के बजाय लुंबिनी रवाना हो जाते हैं। इस तरह कुशीनगर केवल एक ट्रांजिट पॉइंट बनकर रह गया है।

  • अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तैयार, लेकिन उड़ानें शुरू नहीं
  • रेल कनेक्टिविटी योजना वर्षों से लंबित
  • ई-कार्ट सेवा बंद, वाहन अनुपयोगी
  • सूचना केंद्र और बस सेवा का अभाव

पर्यटन विभाग का दावा: जल्द दिखेगा बदलाव

इस संबंध में उपनिदेशक पर्यटन, गोरखपुर राजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि पर्यटकों की सुविधाओं के लिए विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर नए आकर्षण विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही कुशीनगर की कई बहुप्रतीक्षित परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी।

उनके अनुसार बुद्धा थीम पार्क और रामाभार स्तूप परिसर में साउंड एंड लाइट शो मार्च तक शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद शाम होते ही कुशीनगर में भगवान बुद्ध के संदेश गूंजेंगे और देश-विदेश के पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा।

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