देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
कुशीनगर जिले में युवाओं के बीच फास्ट फूड और जंक फूड का बढ़ता चलन अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप लेता जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, अत्यधिक फास्ट फूड सेवन के कारण युवा शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर, पीलिया, मोटापा और अपच जैसी बीमारियों की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि भविष्य में जिले की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
ओपीडी में बढ़ रहे अपच और पेट संबंधी रोगी
मंगलवार को पडरौना में निजी प्रैक्टिस कर रहे डीएम गैस्ट्रो रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण कुमार राव ने बताया कि गैस्ट्रो विभाग में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जिन्हें अपच और पेट से जुड़ी समस्याएं हैं। डॉक्टर के अनुसार, एक ही दिन में गैस्ट्रो ओपीडी में दोपहर एक बजे तक कुल 107 मरीज पहुंचे, जिनमें से करीब 20 मरीजों में फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से जुड़ी बीमारियां पाई गईं।
डॉ. राव ने बताया कि पूछताछ के दौरान इन मरीजों ने खुद स्वीकार किया कि वे नियमित रूप से फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन करते हैं।
सामने आ रही गंभीर बीमारियां
चिकित्सकों के अनुसार, फास्ट फूड का लगातार सेवन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है। कुशीनगर में जिन बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं, उनमें प्रमुख हैं:
फैटी लिवर
पीलिया
शुगर (डायबिटीज)
हाई ब्लड प्रेशर
मोटापा
अपच और गैस की समस्या
डॉ. प्रवीण राव के अनुसार, ये सभी बीमारियां पहले अधिकतर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 20 से 35 वर्ष के युवाओं में भी आम होती जा रही हैं।
फास्ट फूड क्यों बन रहा है खतरनाक
डॉ. राव ने बताया कि जंक फूड में ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और आर्टिफिशियल फ्लेवर की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के सॉस, प्रिजरवेटिव और रसायनों का उपयोग किया जाता है, जो लंबे समय तक शरीर में जमा होकर गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं।
उन्होंने कहा कि जंक फूड का अत्यधिक सेवन युवाओं को हृदय रोगों की ओर भी धकेल रहा है, जो भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी घातक समस्याओं का कारण बन सकता है।
आंकड़ों में समझें समस्या की गंभीरता
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल गैस्ट्रो ओपीडी मरीज | 107 |
| फास्ट फूड से प्रभावित मरीज | 20 |
| प्रमुख रोग | फैटी लिवर, शुगर, हाई बीपी, अपच |
| प्रभावित आयु वर्ग | 20–35 वर्ष |
सरकारी प्रयास और जागरूकता की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पहले से ही फिट इंडिया मूवमेंट, आयुष्मान भारत और स्कूल हेल्थ प्रोग्राम जैसे अभियानों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिला स्तर पर भी यदि स्कूलों, कॉलेजों और युवाओं के बीच संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को लेकर जागरूकता फैलाई जाए, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉक्टरों की सलाह: बदलें जीवनशैली
डॉ. प्रवीण राव ने युवाओं को सलाह दी कि वे:
फास्ट फूड और जंक फूड का सेवन कम करें
घर का बना ताजा और संतुलित भोजन करें
नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करें
पर्याप्त पानी पिएं और नींद पूरी लें
पेट संबंधी समस्या होने पर समय पर डॉक्टर से परामर्श लें
निष्कर्ष
कुशीनगर में युवाओं के बीच फास्ट फूड का बढ़ता चलन एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। सरकार, स्वास्थ्य विभाग और समाज—तीनों के संयुक्त प्रयास से ही युवाओं को स्वस्थ दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। सही जानकारी, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
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