कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता
कुशीनगर बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी की मार्मिक घटना ने बुधवार को पडरौना नगर को भावुक कर दिया, जब बहुजन समाज पार्टी के पूर्व जिला सचिव एवं विधानसभा सचिव रहे स्वर्गीय शंभू रावत की अंतिम यात्रा में उनकी चारों बेटियों ने कंधा देकर मुखाग्नि दी। ओंकार वाटिका से उठी शव यात्रा खिरकिया घाट तक पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। इस दृश्य ने परंपरागत धारणाओं से आगे बढ़ते समाज का संदेश दिया और उपस्थित जनसमूह की आंखें नम कर दीं।
कुशीनगर बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी: परंपरा से आगे बढ़ता समाज
कुशीनगर बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी—यह केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बनकर सामने आया। अंतिम यात्रा में चारों बेटियां कंधा देती हुईं आगे बढ़ीं। घाट पर पहुंचकर उन्होंने सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए और मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी।
- ओंकार वाटिका से निकली अंतिम यात्रा
- खिरकिया घाट पर विधि-विधान से संस्कार
- चारों बेटियों ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी
- सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिकों की मौजूदगी
उपस्थित लोगों ने इसे साहस, संस्कार और समानता का संदेश बताते हुए परिवार की सराहना की।
स्वर्गीय शंभू रावत का सामाजिक योगदान
स्वर्गीय शंभू रावत बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे और संगठनात्मक दायित्व निभाए। स्थानीय स्तर पर उनके सरल स्वभाव, सामाजिक सक्रियता और सहयोगी दृष्टिकोण की चर्चा अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के बीच होती रही। श्रद्धांजलि सभा में कई वक्ताओं ने उनके जनसंपर्क और समाजहित के कार्यों को याद किया।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | पडरौना नगर, कुशीनगर |
| अंतिम संस्कार स्थल | खिरकिया घाट |
| परिवार | पत्नी गीता देवी एवं चार बेटियां |
| विशेष तथ्य | चारों बेटियों ने कंधा देकर मुखाग्नि दी |
परिवार का संकल्प और साहस
करीबी रहे राममिलन निगम ने बताया कि स्वर्गीय रावत के कोई पुत्र नहीं थे। ऐसे में बेटियों ने बेटे का दायित्व निभाते हुए सभी संस्कार पूरे किए। उनकी पत्नी गीता देवी, जो एक प्रोफेसर हैं, ने पूरे धैर्य के साथ परिवार को संभाला।
परिवार की बड़ी बेटी पूजा पीएचडी की तैयारी कर रही हैं, दूसरी बेटी सोनाली उच्च न्यायालय में वकालत कर रही हैं, जबकि अन्य दोनों बेटियां भी उच्च शिक्षा में संलग्न हैं। परिवार ने कहा कि वे अपने पिता के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कुशीनगर बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी: सामाजिक संदेश
कुशीनगर बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी की घटना ने यह संदेश दिया कि पारिवारिक दायित्वों और संस्कारों में बेटियां किसी से कम नहीं। समाज में बदलती सोच और शिक्षा के प्रसार के साथ ऐसी घटनाएं समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक संकेत देती हैं।
अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य व शक्ति प्रदान हो।
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