कुशीनगर में सांड के हमले में घायल किसान मिट्ठू यादव की इलाज के दौरान मौत, एक ही गांव के दो किसानों की गई जान | Webvarta

कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में छुट्टा पशुओं के आतंक ने एक बार फिर दो परिवारों को उजाड़ दिया। हाटा कोतवाली क्षेत्र के भिस्वां बाजार में 12 फरवरी को छुट्टा सांडों के झुंड के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए मिट्ठू यादव (65 वर्ष) की गुरुवार दोपहर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इससे पहले इसी हमले में किसान मल्लु यादव की मौके पर ही जान चली गई थी।

एक ही गांव के दो किसानों की सात दिनों के भीतर हुई मौत से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि छुट्टा पशुओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

कैसे हुआ था हमला

जानकारी के अनुसार, 12 फरवरी को भिस्वां बाजार क्षेत्र में अचानक छुट्टा सांडों के झुंड ने किसानों पर हमला कर दिया। इस हमले में किसान मल्लु यादव गंभीर रूप से घायल हो गए और घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई।

उन्हें बचाने पहुंचे मिट्ठू यादव को भी सांडों ने बुरी तरह घायल कर दिया। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तत्काल इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

सात दिन बाद टूटी जीवन की डोर

लगातार सात दिनों तक चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चलता रहा, लेकिन गुरुवार दोपहर इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार, चोटें गंभीर थीं और शरीर पर गहरे घाव थे।

उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। परिजन और ग्रामीण गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए।

ग्रामीणों में आक्रोश

लगातार दो किसानों की मौत से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि छुट्टा पशुओं की समस्या से वे लंबे समय से जूझ रहे हैं, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकाला गया।

प्रधान प्रतिनिधि सोनू जायसवाल सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मृतक के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा देने की मांग की है।

प्रशासन से उठी मांगें

ग्रामीणों का कहना है कि छुट्टा पशुओं को पकड़ने और सुरक्षित स्थान पर रखने की प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

गांव के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसानों ने मांग की है कि प्रशासन स्थायी समाधान के लिए विशेष अभियान चलाए और प्रभावित परिवारों को राहत पैकेज उपलब्ध कराए।

छुट्टा पशुओं की बढ़ती समस्या

कुशीनगर सहित प्रदेश के कई जिलों में छुट्टा पशुओं का मुद्दा गंभीर बनता जा रहा है। किसान फसलों की सुरक्षा के साथ-साथ अपनी जान जोखिम में डालकर खेतों में काम करने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि गौशालाओं की संख्या बढ़ाने, पशुओं के टैगिंग सिस्टम और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

भिस्वां बाजार में एक ही गांव के दो किसानों की मौत ने छुट्टा पशुओं की समस्या को फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह घटना प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो ऐसी त्रासदियां दोहराई जा सकती हैं।

अब पूरे क्षेत्र की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई और मृतक परिवारों को मिलने वाली सहायता पर टिकी हैं।

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