वाराणसी, अजय कुमार | वेब वार्ता
प्रयाग माघ मेले की पूर्णाहुति के पश्चात भगवान श्री कुंभेश्वर महादेव पुनः श्री काशी विश्वनाथ धाम पधार चुके हैं। त्रिवेणी तट पर 45 दिवसीय प्रवास के उपरांत आज प्रातः उन्हें विधिवत काशी लाया गया, जहाँ शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
काशी और प्रयाग की आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक भगवान कुंभेश्वर महादेव का मंदिर प्रांगण में भव्य स्वागत किया गया। वेदपाठी विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष आरती एवं अभिषेक किया गया।
आध्यात्मिक परंपरा और माघ मेला प्रवास
मान्यता के अनुसार, भगवान कुंभेश्वर महादेव श्री काशी विश्वनाथ जी के ‘कुंभ स्नान स्वरूप’ हैं। प्रतिवर्ष माघ मेला एवं कुंभ पर्व के अवसर पर वे प्रयागराज में विराजमान होते हैं।
इसी परंपरा के निर्वहन हेतु 01 जनवरी 2026 को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा विधि-विधान से पूजन के उपरांत उन्हें प्रयागराज भेजा गया था, जहाँ वे श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे थे।
त्रिवेणी संगम से विदाई और काशी में स्वागत
आज प्रातः त्रिवेणी संगम के पावन जल से भगवान का अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भावपूर्ण विदाई के पश्चात उन्हें काशी के लिए रवाना किया गया।
काशी पहुँचने पर मंदिर न्यास के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्वानों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा पुनः विधिवत पूजन संपन्न कराया गया।
दर्शन मात्र से मिलेगा कुंभ स्नान का पुण्य
मंदिर के अर्चक आचार्य पं. ओमप्रकाश ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कुंभ अवधि में स्नान से जो पुण्य प्राप्त होता है, वही फल श्रद्धापूर्वक भगवान कुंभेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सूचना
मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण ने बताया कि आगामी माघ मास तक भगवान कुंभेश्वर महादेव मंदिर परिसर के उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित श्री विघ्न विनाशक गणपति मंदिर में विराजमान रहेंगे।
श्रद्धालु प्रतिदिन वहां दर्शन-पूजन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
निष्कर्ष
भगवान कुंभेश्वर महादेव का काशी आगमन काशी और प्रयाग की आध्यात्मिक परंपरा को सुदृढ़ करने वाला ऐतिहासिक एवं धार्मिक अवसर सिद्ध हुआ है।
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