गांव आशा से उठी निर्भीक कलम हुई मौन: हरदोई के वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश सिंह का निधन, पत्रकारिता-जगत में शोक

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हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

जनपद हरदोई के गांव आशा में जन्मे वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद एवं समाजसेवी अखिलेश सिंह का अकस्मात निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर से पत्रकारिता, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक फैल गया है। अखिलेश सिंह अपनी निर्भीक और विचारोत्तेजक लेखनी के लिए जाने जाते थे। वे न केवल पत्रकारिता जगत के स्तंभ थे, बल्कि शिक्षा और सनातन संस्कृति के भी सशक्त संवाहक थे। उनका जाना हरदोई ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

पत्रकारिता में निर्भीकता और जनहित की मिसाल

अखिलेश सिंह ने अपने लंबे करियर में पत्रकारिता को सच्चाई और निष्पक्षता की कसौटी पर खरा उतारा। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में थे जिन्होंने व्यवस्था से सवाल करने का साहस दिखाया और समाज को जागरूक करने का बीड़ा उठाया। उनकी कलम में जहां सत्ता से सवाल करने की हिम्मत थी, वहीं समाज को सही दिशा देने की भावना भी झलकती थी। उनके लेख और संपादकीय हमेशा जनहित को केंद्र में रखते हुए लिखे जाते थे। वे पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

शिक्षा के क्षेत्र में भी निभाई अहम भूमिका

समाज को शिक्षित और संस्कारित बनाने के उद्देश्य से उन्होंने डालसिंह मेमोरियल स्कूल की स्थापना की। इस विद्यालय के माध्यम से उन्होंने शिक्षा की अलख जगाई और सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को संवारा। उनके मार्गदर्शन में यह संस्थान केवल ज्ञान का केंद्र नहीं रहा, बल्कि संस्कार और मूल्य शिक्षा का भी प्रतीक बना। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को हरदोई के लोग हमेशा याद रखेंगे।

सनातन संस्कृति के संवाहक और आस्था के प्रतीक

गहरी आस्था और धार्मिकता के प्रतीक अखिलेश सिंह ने रेलवे गंज स्थित श्री रामधाम की स्थापना कर सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने धर्म और समाज को जोड़ने का कार्य किया और सनातन धर्म की वैचारिक धारा को मजबूत किया। उनकी धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक दृष्टि ने उन्हें समाज के हर वर्ग में सम्मान दिलाया। वे जीवनभर ईश्वर भक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित रहे।

युवा पत्रकारों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत

अखिलेश सिंह केवल वरिष्ठ पत्रकार नहीं थे, बल्कि युवा पत्रकारों के लिए एक मार्गदर्शक और गुरु की भूमिका निभाते थे। उन्होंने अपने अनुभवों से नई पीढ़ी को पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी। कई बार वे कठिन समय में अपने सहयोगियों के लिए संबल बनकर खड़े हुए। उनके साथ काम करने वाले पत्रकार बताते हैं कि “वे सख्त जरूर थे, लेकिन हमेशा न्यायपूर्ण और सहयोगी रहे।” पत्रकारिता जगत में उन्हें एक संरक्षक और प्रेरणास्रोत के रूप में याद किया जाएगा।

अचानक बिगड़ी तबीयत, लखनऊ ले जाते समय निधन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह करीब 4 बजे अचानक अखिलेश सिंह की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तुरंत बालाजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया। लेकिन लखनऊ ले जाते समय ही रास्ते में उन्होंने अंतिम सांस ले ली। उनके निधन से परिवार, मित्रों और पूरे हरदोई जनपद में गहरा शोक छा गया है।

  • हरदोई के वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद और समाजसेवी अखिलेश सिंह का असामयिक निधन।
  • पत्रकारिता, शिक्षा और सनातन संस्कृति के संवाहक — समाज में छोड़ी अमिट छाप।
  • लखनऊ ले जाते समय रास्ते में ली अंतिम सांस, पत्रकार जगत में शोक की लहर।

अखिलेश सिंह का जाना हरदोई की पत्रकारिता के इतिहास में एक गहरा खालीपन छोड़ गया है। वे न केवल एक निर्भीक पत्रकार थे, बल्कि सच्चे शिक्षक, समाजसेवी और धर्मनिष्ठ इंसान भी थे। आज हरदोई के लोगों की आंखें नम हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व और कार्य सदैव प्रेरणा देता रहेगा। निस्संदेह, उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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