हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
77वें गणतंत्र दिवस जैसे पावन राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर हरदोई जिले से राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली एक बेहद गंभीर और शर्मनाक घटना सामने आई है। बाल विकास परियोजना कार्यालय टोंडरपुर के पास स्थित एक खंडहरनुमा सरकारी इमारत के गंदगी भरे शौचालय में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फेंका हुआ पाया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्कूली बच्चों ने उठाया शौचालय में पड़ा तिरंगा
हरदोई में गणतंत्र दिवस पर तिरंगे का अपमान 🇮🇳
टोंडरपुर स्थित सरकारी परिसर के गंदे शौचालय में राष्ट्रीय ध्वज मिला। पास से गुजर रहे स्कूली बच्चों ने उसे उठाया। घटना का वीडियो वायरल, लोगों में आक्रोश। ध्वज संहिता उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग।#Hardoi #Tiranga #RepublicDay #NationalFlag pic.twitter.com/qaTVv2t1TU— Webvarta News Agency (@webvarta) January 26, 2026
इस मामले में सबसे अधिक चिंताजनक और भावनात्मक पहलू यह रहा कि वहां से गुजर रहे प्राथमिक विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चे शौचालय में पड़े तिरंगे को एक-एक कर उठाते नजर आए। यह दृश्य न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति संवेदनशीलता की गंभीर कमी की ओर भी इशारा करता है।
कर्मचारियों की लापरवाही का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि उक्त राष्ट्रीय ध्वज परियोजना से जुड़े कर्मचारियों या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ही लापरवाहीपूर्वक फेंका गया। नियमानुसार तिरंगे को या तो सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा जाना चाहिए था अथवा बच्चों को विधिवत सौंपा जाना चाहिए था, लेकिन यहां नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई।
राष्ट्रीय ध्वज संहिता का उल्लंघन
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अंतर्गत तिरंगे के सम्मान, मर्यादा और संरक्षण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय ध्वज को जमीन पर, गंदगी में या अपमानजनक स्थान पर नहीं रखा जा सकता। इस घटना को राष्ट्रीय ध्वज संहिता का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है, जिसे देश के सर्वोच्च प्रतीक के अपमान के रूप में देखा जा रहा है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों और प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मामले को दबाने और अनदेखा करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया है।
निष्कर्ष
गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे के साथ हुई यह घटना प्रशासनिक संवेदनहीनता और लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस कृत्य के लिए जिम्मेदार कौन है और क्या दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी या मामला यूं ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
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