Thursday, February 5, 2026
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हरदोई में 10 फरवरी को 20.66 लाख बच्चों को मिलेगी कृमि मुक्ति की दवा

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

जनपद हरदोई में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (NDD) के तहत आगामी 10 फरवरी को बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 20.66 लाख बच्चों को पेट से कीड़े निकालने की दवा एल्बेन्डाजोल खिलाई जाएगी। अभियान को सफल बनाने के लिए कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अंतर्विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई।

शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के निर्देश

स्वामी विवेकानंद सभागार, कलेक्ट्रेट हरदोई में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बच्चा दवा सेवन से वंचित न रहे। इसके लिए विद्यालयों में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। जो बच्चे बीमारी या अन्य कारणों से 10 फरवरी को दवा नहीं ले पाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के तहत दवा दी जाएगी।

4960 स्कूल और 3542 आंगनबाड़ी केंद्रों से होगा वितरण

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडेय ने जानकारी दी कि यह दवा वर्ष में दो बार फरवरी और अगस्त में खिलाई जाती है। इस बार जनपद के शहरी क्षेत्र एवं 17 ब्लॉकों के अंतर्गत 4,960 सरकारी, सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों तथा 3,542 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को एल्बेन्डाजोल दी जाएगी।
वहीं कछौना और सुरसा ब्लॉक में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत भी दवा खिलाई जाएगी।

एनीमिया और कुपोषण से बचाव में सहायक

सीएमओ ने बताया कि कृमि संक्रमण बच्चों में एनीमिया का एक प्रमुख कारण है, जिससे उनकी शारीरिक वृद्धि प्रभावित होती है और पढ़ाई में एकाग्रता कम हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को अभिभावकों को दवा के लाभों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

खुराक और सावधानियां

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के नोडल अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि:

  • 1 से 2 वर्ष के बच्चों को एल्बेन्डाजोल की आधी गोली दी जाएगी
  • 2 से 19 वर्ष के बच्चों को एक पूरी गोली खिलाई जाएगी
  • दवा को चबाकर या चूरा बनाकर देना अनिवार्य
  • दवा सेवन स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में ही कराया जाएगा

दवा सेवन के बाद कुछ बच्चों में उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर या पेट दर्द जैसे हल्के प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं, जिनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसी स्थिति में बच्चे को आराम देने से लक्षण शीघ्र समाप्त हो जाते हैं। इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा, सीएमओ, सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी तथा समस्त ब्लॉकों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।

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