हरदोई में जिला उद्यान अधिकारी सुभाष चन्द्र ने किसानों को दी सलाह, आम की बेहतर पैदावार के लिए समय पर कीट एवं रोग नियंत्रण जरूरी

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

हरदोई जिले के जिला उद्यान अधिकारी सुभाष चन्द्र ने आम उत्पादक किसानों को सचेत करते हुए कहा है कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए कीट एवं रोगों का समय पर समुचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि बौर निकलने से लेकर फल बनने तक की अवस्था अत्यधिक संवेदनशील होती है, जिस दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है।

भुनगा और मिज कीट से नुकसान की आशंका

इस समय आम की फसल पर भुनगा, मिज कीट, थ्रिप्स (रूजी कीट), कैटरपिलर/कटर कीट तथा खर्रा रोग का प्रकोप होने की संभावना अधिक रहती है।

भुनगा कीट कोमल पत्तियों और फूलों का रस चूसकर उन्हें सुखा देता है, जबकि इसके द्वारा छोड़े गए पदार्थ पर काली फफूंद जमने से प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है।

मिज कीट मंजरियों और नवगठित फलों में अंडे देकर अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता है, जिससे प्रभावित भाग काला पड़कर सूख जाता है।

स्टिकी ट्रैप और दवाओं के प्रयोग की सलाह

मिज एवं थ्रिप्स कीट के नियंत्रण के लिए ब्ल्यू एवं येलो स्टिकी ट्रैप 20 से 25 प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने की सलाह दी गई है।

इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर फिप्रोनिल या थियाक्लोप्रिड का छिड़काव भी प्रभावी माना गया है।

खर्रा रोग से बचाव के उपाय

खर्रा रोग के कारण पत्तियों और फलों पर सफेद चूर्ण जैसी फफूंद दिखाई देती है, जिससे मंजरियां सूखने लगती हैं।

इसके नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक तथा हेक्साकोनाजोल के छिड़काव को प्रभावी बताया गया है।

कैटरपिलर और गुजिया कीट से सुरक्षा

कैटरपिलर या कटर कीट नई पत्तियों और फलों को नुकसान पहुंचाकर कई बार फलों को डंठल सहित गिरा देता है, जिससे बागवानों को आर्थिक क्षति होती है।

इसके नियंत्रण हेतु लाइट ट्रैप तथा उपयुक्त कीटनाशकों के प्रयोग की आवश्यकता बताई गई है।

गुजिया कीट के नियंत्रण के लिए पेड़ों पर लगाई गई पॉलिथीन पट्टी की नियमित सफाई और आवश्यकतानुसार इमिडाक्लोप्रिड के प्रयोग की सलाह दी गई है।

परागण के समय छिड़काव से बचें

जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों से अपील की कि जब बागों में बौर पूरी तरह खिला हो, उस समय रासायनिक दवाओं का छिड़काव न करें, ताकि परागण प्रक्रिया प्रभावित न हो और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।

निष्कर्ष

समय पर कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाकर आम उत्पादक किसान अपनी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि कर सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना लाभकारी सिद्ध होगा।

👉 कृषि और बागवानी से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

ये भी पढ़ें: हरदोई में दिनदहाड़े महिला से कुंडल छीनकर फरार बदमाश, पाली–शाहाबाद मार्ग पर वारदात से दहशत

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
- Advertisement -

Latest

More articles