-लक्ष्मीकांत पाठक
हरदोई, 31 मार्च (वेब वार्ता)। महिलाओं के दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चाणक्य कंपटीशन क्लासेज में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन तहसील विधिक सेवा समिति, सदर हरदोई द्वारा किया गया, जिसमें जनपद न्यायाधीश रीता कौशिक एवं अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट काव्या सिंह के मार्गदर्शन में आयोजन संपन्न हुआ।
दहेज उत्पीड़न कानूनों की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में विधिक सलाहकार कीर्ति कश्यप ने दहेज उत्पीड़न के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद पति या ससुराल पक्ष द्वारा अतिरिक्त धन, सामान या संपत्ति की मांग के लिए महिला को शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करना दहेज उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और 304बी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के अंतर्गत दहेज लेना और देना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं।
निःशुल्क विधिक सेवाओं की जानकारी
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध निःशुल्क विधिक सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पंपलेट वितरित कर नालसा की टोल-फ्री हेल्पलाइन संख्या 15100 के बारे में अवगत कराया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग आसानी से सहायता प्राप्त कर सकें।
शिक्षा के महत्व पर भी जोर
चाणक्य कंपटीशन क्लासेज के प्रबंधक सौरभ त्रिपाठी ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जागरूकता और शिक्षा ही समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में शिक्षक शिवम पांडे, उत्कर्ष, प्रखर दीक्षित तथा सामाजिक कार्यकर्ता विजय श्रीवास्तव सहित कई लोग उपस्थित रहे।
यह शिविर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और समाज में दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।



