Wednesday, January 14, 2026
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हरदोई में गर्रा नदी की बाढ़: तटवर्ती गांवों में दहशत, फसलों और मकानों पर संकट, प्रशासन की चुप्पी

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक (वेब वार्ता)। हरदोई जिले में लगातार बारिश के कारण गर्रा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल है। वासितनगर, उमरिया धानी, कालागाडा, वारी, गनुआपुर, सिंगुलापुर, गुजीदेई, परेली, खजुहाई, कहारकोला, अतर्जी, गुटकामऊ, बैजूपुर सहित सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आने के खतरे में हैं। ग्रामीण अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुट गए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने से लोगों में नाराजगी और भय बढ़ रहा है।

फसलों पर संकट

गर्रा नदी का पानी खेतों में घुसने से धान की हजारों बीघा फसल डूबने की कगार पर है। किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल तैयार होने वाली थी, लेकिन बाढ़ के कारण पैदावार पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। इसके अलावा, गन्ना, अरहर, और सब्जियों की फसलें भी खतरे में हैं। पिछले साल 2024 में भी गर्रा नदी के उफान ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें कई गांव जलमग्न हो गए थे और फसलें नष्ट हो गई थीं।

कटान और मकानों पर खतरा

निचले इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है, जिससे मकानों और मवेशियों पर संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों ने, अपने जरूरी सामान को समेटना शुरू कर दिया है। कई परिवारों को डर है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा, तो उन्हें गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ेगा।

प्रशासन पर मौन का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन बाढ़ की आशंका के बावजूद निष्क्रिय है। न तो राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, न ही कटान रोकने के लिए कोई उपाय किए गए हैं। नावों, बचाव दलों, राहत सामग्री, दवाइयों, और मवेशियों के चारे की व्यवस्था भी नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कहा:

“प्रशासन सिर्फ हवाई बातें करता है। न कोई अधिकारी हाल लेने आया, न राहत सामग्री मिली। अगर जल्द मदद नहीं मिली, तो हमें गांव छोड़ना पड़ेगा।”

पिछले साल जुलाई 2024 में भी, गर्रा नदी के उफान के दौरान कहारकोला गांव टापू में बदल गया था, और ग्रामीणों ने प्रशासन पर केवल एक नाव देने का आरोप लगाया था। इस बार भी स्थिति वैसी ही दिख रही है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • राहत सामग्री और दवाइयां: बाढ़ प्रभावितों के लिए भोजन, पीने का पानी, और दवाओं की तत्काल व्यवस्था।
  • मवेशियों के लिए चारा: पशुओं के चारे की कमी को दूर करने के लिए आपूर्ति।
  • नाव और बचाव दल: आवागमन और बचाव के लिए पर्याप्त नावें और प्रशिक्षित टीमें।
  • कटान रोकने के उपाय: बांधों और तटबंधों को मजबूत करने के लिए ठोस कदम।

सुझाव और भविष्य की जरूरत

  • तत्काल राहत: प्रशासन को तुरंत राहत शिविर स्थापित करने, नावों और बचाव दलों की व्यवस्था करने की जरूरत है।
  • दीर्घकालिक उपाय: गर्रा नदी के कटान को रोकने के लिए स्थायी तटबंध और बांधों का निर्माण जरूरी है।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित बारिश और बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रशासन को बाढ़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को अपनाना चाहिए।

निष्कर्ष

हरदोई में गर्रा नदी का बढ़ता जलस्तर तटवर्ती गांवों के लिए गंभीर खतरा बन गया है। हजारों बीघा फसलें और मकान खतरे में हैं, और प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ रहा है। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। सरकार और प्रशासन को ग्रामीणों की मांगों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए ताकि जान-माल और फसलों को बचाया जा सके।

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