हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
जनपद हरदोई में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के शस्त्र अनुभाग से संबंधित एक शस्त्र लाइसेंस पत्रावली के कथित रूप से गायब होने एवं अभिलेखों में अनियमितता के गंभीर आरोपों के बाद कोतवाली शहर पुलिस ने तीन लिपिकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अपराध संख्या 107/26 के तहत संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।
शस्त्र लाइसेंस अंतरण से जुड़ा है मामला
इस प्रकरण में आवेदक विनय कुमार शुक्ला, शस्त्र लिपिक प्रथम, जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय हरदोई द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार वर्ष 2015 में श्रीशचन्द्र बाजपेयी ने अपने दिवंगत पिता स्वर्गीय रामकिशोर बाजपेयी के नाम निर्गत शस्त्र लाइसेंस को अपने नाम स्थानांतरित कराने हेतु विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया था।
प्रकरण से जुड़ी मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| लाइसेंस संख्या | 330 |
| गन संख्या | सी/7-2638 (12 बोर) |
| आवेदन वर्ष | 2015 |
| अपराध संख्या | 107/26 |
नियमानुसार आवेदन पत्र पर परीक्षण, संस्तुति एवं आदेश की प्रक्रिया पूरी की जानी थी, लेकिन आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों द्वारा इसे जानबूझकर लंबित रखा गया।
लिपिकों पर गंभीर आरोप
आरोप है कि तत्कालीन शस्त्र लिपिक हरिसिंह ने अपने सहयोगियों सुधीर एवं पंडित के साथ मिलकर प्रकरण का विधिसम्मत निस्तारण नहीं किया। संबंधित पत्रावली को अभिलेखागार में दाखिल दिखाते हुए वास्तविक कार्रवाई लंबित रखी गई।
अभिलेखों से छेड़छाड़ की आशंका
बाद में जांच के दौरान पत्रावली के अभिलेखागार में उपलब्ध न होने पर उसके गायब होने की पुष्टि हुई। तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि पत्रावली को हटाने अथवा नष्ट करने का प्रयास किया गया, जिससे शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका प्रबल हो गई है।
- पत्रावली जानबूझकर लंबित रखने का आरोप
- अभिलेखागार से फाइल गायब होने की पुष्टि
- सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
कोतवाली शहर पुलिस ने नामजद आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 238 एवं 62 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रकरण की निष्पक्ष एवं गहन विवेचना की जा रही है। अभिलेखीय साक्ष्यों, कर्मचारियों के बयान एवं दस्तावेजों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी महत्वपूर्ण पत्रावली के गायब होने का मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह शासकीय कार्यप्रणाली में बड़ी लापरवाही मानी जाएगी। प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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