लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से महिला सशक्तिकरण अब हकीकत बन चुका है। गोरखपुर की मंशा देवी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि 60 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा ड्राइविंग का प्रशिक्षण देकर लखपति दीदी बनने का रास्ता दिखाया। एक वर्ष में उनकी आय ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई। अब मंशा देवी 26 जनवरी को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी।
सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम के तहत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन के निर्देशन में चल रही यह पहल महिलाओं को सुरक्षित परिवहन, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता प्रदान कर रही है। मंशा देवी दिन-रात बेखौफ ई-रिक्शा चलाती हैं और अन्य महिलाओं को आत्मविश्वास की चाबी थमा रही हैं।
मंशा देवी की सफलता की कहानी: समूह सखी से ट्रेनर तक
पहले मंशा देवी के पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं था। सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई।
- आय: प्रतिदिन 800-1000 रुपये, मासिक 20-30 हजार, सालाना ढाई-तीन लाख।
- वित्तीय सहायता: मुद्रा योजना से 1.25 लाख और ब्लॉक स्तर से 1 लाख रुपये।
- प्रशिक्षण: ब्रह्मपुर ब्लॉक सहित गोरखपुर जिले की 60 महिलाओं को ड्राइविंग, लाइसेंस और उद्यमिता का प्रशिक्षण।
- प्रभाव: सभी महिलाएं अब सुरक्षित माहौल में ई-रिक्शा चला रही हैं, परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
मंशा देवी ने कहा, “सीएम योगी की योजनाओं ने हमें नई जिंदगी दी। अब हम दिन-रात बेखौफ फर्राटा भर रही हैं।”
सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम: महिला सुरक्षा और स्वरोजगार का मॉडल
यह कार्यक्रम डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स और आजीविका मिशन के अनुबंध से चल रहा है। सुरक्षित परिवहन का माहौल महिलाओं को स्वाभिमान के साथ सड़कों पर उतार रहा है। ग्रामीण महिलाएं ई-रिक्शा चलाकर न केवल आय कमा रही हैं, बल्कि समाज में सम्मान भी पा रही हैं।
यह पहल यूपी में बदले सामाजिक-आर्थिक वातावरण की गवाही है। ग्रामीण महिलाएं साबित कर रही हैं कि सही अवसर मिलें तो वे खुद को और पूरे समाज को आगे बढ़ा सकती हैं।
PM मोदी से मुलाकात: लखपति दीदी की प्रेरणा
26 जनवरी को मंशा देवी प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगी। यह सम्मान उनकी मेहनत और सशक्तिकरण की मिसाल है।




