देवरिया, ममता तिवारी | वेबवार्ता
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित नए नियम 2026 के विरोध में देवरिया में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को देवरिया तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सामान्त मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा देकर विरोध दर्ज कराया। उनके इस कदम को यूजीसी नियमों के खिलाफ एक बड़ा और प्रतीकात्मक विरोध माना जा रहा है।
“यह नियम अत्याचार है” – सामान्त मिश्रा
सामान्त मिश्रा ने तहसील बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी को सौंपे अपने इस्तीफे में कहा कि यूजीसी का यह नया नियम अत्याचारपूर्ण है और इसके लागू होने से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस नियम को लेकर सवर्ण समाज में गहरा विरोध है और छात्रों के बीच भारी असंतोष व्याप्त है।
रॉलेट एक्ट से की तुलना
अधिवक्ता सामान्त मिश्रा ने यूजीसी 2026 के नियमों की तुलना अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1919 में बनाए गए रॉलेट एक्ट से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह रॉलेट एक्ट के विरोध में जलियांवाला बाग जैसी घटनाएं हुई थीं, उसी तरह यह नियम भी समाज में असंतोष और टकराव को जन्म दे सकता है। उनका आरोप है कि नया नियम बिना समुचित जांच के मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मानसिकता को बढ़ावा देता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक सिद्ध होगा।
समाज को बांटने का आरोप
सामान्त मिश्रा ने कहा कि यूजीसी का नया नियम जाति, धर्म और समाज के आधार पर विभाजन को बढ़ावा देने वाला है। इससे शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
वकीलों और राजनीतिक जानकारों की प्रतिक्रिया
इस मामले पर कुछ अन्य अधिवक्ताओं का भी कहना है कि सरकार यूजीसी 2026 का नियम लागू कर समाज में अराजकता की स्थिति पैदा करना चाहती है, जिससे अलगाववाद और अस्थिरता बढ़ सकती है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इसका असर उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को नुकसान के रूप में देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, देवरिया में बार एसोसिएशन अध्यक्ष का इस्तीफा यह संकेत देता है कि यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध अब केवल छात्र संगठनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में यह मुद्दा गंभीर रूप लेता जा रहा है।
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