देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
Deoria Sterilization Case ने स्वास्थ्य विभाग को असमंजस में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में नसबंदी ऑपरेशन कराने के लगभग डेढ़ वर्ष बाद एक महिला के गर्भवती होने का मामला सामने आया है। तरकुलवा थाना क्षेत्र की निवासी महिला ने 5 मार्च 2024 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नसबंदी कराई थी, लेकिन अब गर्भधारण की पुष्टि होने के बाद उसने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है।
Deoria Sterilization Case: क्या है पूरा मामला?
स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, संबंधित महिला ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत 5 मार्च 2024 को नसबंदी ऑपरेशन कराया था। परिवार नियोजन के स्थायी उपाय के रूप में की गई इस सर्जरी के बाद महिला सामान्य जीवन व्यतीत कर रही थी। हालांकि, हाल ही में उसे गर्भधारण का पता चला, जिससे परिवार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया।
महिला का कहना है कि जब वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची और अपने नसबंदी प्रमाण पत्र पर संबंधित अधिकारियों से हस्ताक्षर कराने का अनुरोध किया, तो मना कर दिया गया। इसके बाद उसने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
एसीएमओ डॉ. ए.के. शाही ने बताया कि नसबंदी ऑपरेशन के बाद 1 से 2 प्रतिशत मामलों में विफलता की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित महिला समय से जानकारी देती है, तो शासन की गाइडलाइन के अनुसार मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
- नसबंदी के बाद 1–2% मामलों में विफलता संभव
- शिकायत मिलने पर जांच और दस्तावेज सत्यापन
- पात्रता के आधार पर मुआवजा प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शासन स्तर पर चिंता क्यों?
Deoria Sterilization Case ने परिवार नियोजन कार्यक्रम की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि नसबंदी के बाद गर्भधारण होता है, तो यह तकनीकी त्रुटि, प्रक्रिया में कमी या फॉलो-अप की लापरवाही का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में न केवल चिकित्सा प्रोटोकॉल की समीक्षा आवश्यक होती है, बल्कि प्रभावित परिवार को आर्थिक और सामाजिक सहयोग भी सुनिश्चित करना पड़ता है।
परिवार नियोजन कार्यक्रम राज्य और केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य नीति का हिस्सा है। ऐसे में इस प्रकार के मामलों की पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय करना विभाग की प्राथमिकता मानी जा रही है।
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