Friday, February 20, 2026
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देवरिया कोर्ट के आदेश पर दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग का गर्भपात, डीएनए सैंपलिंग भी कराई गई | Webvarta

देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) वीरेंद्र सिंह की अदालत के आदेश पर बुधवार को मेडिकल कॉलेज में दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग किशोरी का गर्भपात चिकित्सीय बोर्ड की निगरानी में कराया गया। साथ ही भ्रूण की डीएनए सैंपलिंग कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजी गई है।

कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में पीड़िता के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। महिला चिकित्सकों की देखरेख में गर्भ समापन की प्रक्रिया को विधिक और चिकित्सीय मानकों के अनुसार पूरा किया गया।

दुष्कर्म की घटना और केस की पृष्ठभूमि

पुलिस के अनुसार, रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र में 30 नवंबर 2025 को नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। इस मामले में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

घटना के बाद पीड़िता की चिकित्सीय जांच कराई गई, जिसमें उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। चिकित्सीय रिपोर्ट में उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति अत्यंत गंभीर बताई गई थी।

मां ने कोर्ट में लगाया था प्रार्थना पत्र

पीड़िता की मां की ओर से 17 जनवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।

इसमें बताया गया कि नाबालिग पुत्री लगभग सात माह की गर्भवती है और उसकी मानसिक स्थिति बेहद खराब है। परिजनों ने कोर्ट से गर्भ समापन की अनुमति देने की मांग की थी।

मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट तलब

कोर्ट ने उसी दिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया था कि पीड़िता की चिकित्सीय जांच मेडिकल बोर्ड से कराकर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।

हालांकि यह रिपोर्ट 7 फरवरी 2026 को प्रस्तुत की गई, जिसमें हुई देरी को कोर्ट ने गंभीर लापरवाही माना।

सीएमओ की कार्यप्रणाली पर कोर्ट की नाराजगी

विशेष न्यायाधीश ने चिकित्सीय रिपोर्ट तैयार करने में देरी को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया।

कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही संवेदनशील मामलों में पीड़ित के अधिकारों का हनन करती है।

उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला

कोर्ट ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों और प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न, बलात्कार और कौटुंबिक व्यभिचार के मामलों में पीड़िता को गर्भ समापन की अनुमति देना न्यायोचित और मानवीय है।

कोर्ट ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़िता के मानसिक और सामाजिक भविष्य की रक्षा राज्य का दायित्व है।

मेडिकल कॉलेज में कराया गया गर्भपात

कोर्ट के आदेश के बाद पीड़िता को देवरिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां महिला चिकित्सकों और मेडिकल बोर्ड की निगरानी में गर्भ समापन कराया गया।

साथ ही भ्रूण की डीएनए सैंपलिंग कर उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया, ताकि मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराए जा सकें।

राज्य सरकार उठाएगी इलाज का खर्च

कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पीड़िता के इलाज, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़ा समस्त खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

साथ ही प्रशासन को पीड़िता को हर संभव सहायता प्रदान करने के आदेश दिए गए हैं।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का बयान

देवरिया मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एच. के. मिश्र ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन किया गया है।

उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया चिकित्सीय मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संपन्न कराई गई।

निष्कर्ष

देवरिया में दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग किशोरी के गर्भपात का मामला न्यायपालिका की संवेदनशीलता और पीड़ित अधिकारों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों में पीड़िता के स्वास्थ्य, सम्मान और भविष्य को कानूनी प्रक्रिया में सर्वोपरि रखा जा रहा है।

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